मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ‑संवर्धन योजना, उत्तर प्रदेश सरकार की एक सराहनीय और महत्वपूर्ण पहल है।, जिसका मकसद हमारी देशी और उन्नत नस्ल की गायों जैसे गिर, साहीवाल, हरियाणा और थारपारकर को फिर से घर-आंगन और पशुशालाओं में जगह दिलाना है। इस योजना का मकसद है कि हमारी देशी, मजबूत और दूध देने वाली गायों—जैसे गिर, साहीवाल, हरियाणा और थारपारकर—का संरक्षण हो, और किसान इन नस्लों का पालन कर अपनी आमदनी भी बढ़ा सकें। इस योजना का मकसद है कि हमारी देशी, मजबूत और दूध देने वाली गायों—जैसे गिर, साहीवाल, हरियाणा और थारपारकर—का संरक्षण हो, और किसान इन नस्लों का पालन कर अपनी आमदनी भी बढ़ा सकें।
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ‑संवर्धन योजना से मिलने वाली सब्सिडी
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ‑संवर्धन योजना के तहत, सरकार आपको देशी गाय पालने के लिए आर्थिक मदद देती है। अगर आप दो उन्नत नस्ल की गायें खरीदते हैं, तो आपको लगभग 80,000 रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। यह सब्सिडी कुल खर्च का लगभग 40% होती है, जिसमें गाय खरीदना, बीमा, ट्रांसपोर्ट और शेड बनाना शामिल है। यह पैसा सीधे आपके बैंक खाते में भेजा जाता है। इस योजना में महिलाओं के लिए 50% लाभ आरक्षित है, ताकि वे भी गाय पालन करके आत्मनिर्भर बन सकें।
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ‑संवर्धन योजना की पात्रता
- आवेदनकर्ता की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
- पहले से दो या उससे अधिक उन्नत नस्ल की गायें पालने वाले इस योजना के लिए पात्र नहीं होते।
- गाय पालन के लिए आवेदक के पास शेड (पशु रखने की जगह) और चारा आदि की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
- योजना खासतौर पर उन लोगों के लिए है जो स्वदेशी उन्नत नस्ल की गाय पालना चाहते हैं।
- महिलाओं को लाभ का 50% हिस्सा आरक्षित किया गया है।
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ‑संवर्धन योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- पता प्रमाण
- बैंक खाता पासबुक
- पहले से गाय पालने की स्थिति का प्रमाण
- पशु शेड/स्थान की फोटो या स्वीकृति
कैसे आवेदन करें?
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ‑संवर्धन योजना का लाभ लेने के लिए किसान ऑनलाइन वेबसाइट: http://www.animalhusb.upsdc.gov.in/hi आवेदन कर सकते हैं या फिर अपने नजदीकी जिला पशुपालन केंद्र में जाकर ऑफलाइन फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन के साथ उन्हें आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण की प्रति, गायों को रखने की जगह की फोटो और घास उगाने के लिए खेती की जमीन से जुड़ा विवरण संलग्न करना होगा। पूरा फॉर्म भरकर इसे विकास भवन के पशु चिकित्सा अधिकारी, बीडीओ, या सीडीओ ऑफिस में जमा करना होता है। सत्यापन के बाद, पात्र पाए जाने पर सहायता राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाती है।
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