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धान की कटाई के बाद किसान खेत तैयार करते हुए – पराली, खाद और जुताई के साथ

धान की कटाई के बाद करें ये 6 ज़रूरी काम, रबी फसल देगी दोगुना मुनाफा

Ashish Chouhan 5 months ago 0 8

धान कटाई के बाद रबी की तैयारी: देश के कई हिस्सों में धान की कटाई अब लगभग पूरी हो चुकी है। लेकिन असली काम अभी खत्म नहीं हुआ है। अगर किसान इस वक्त खेत की सही तैयारी करें, तो आने वाली रबी की फसल चाहे वो गेहूं हो, चना, मटर या सरसों बहुत अच्छी पैदावार दे सकती है। थोड़ी सी सावधानी, सही प्लानिंग और वक्त पर खेत की तैयारी किसानों को उनकी मेहनत का दोगुना मुनाफा दिला सकती है। 

तो चलिए जानते हैं कि धान कटने के बाद खेत को रबी फसलों के लिए कैसे आसानी से और असरदार तरीके से तैयार किया जा सकता है।

पराली को मत जलाओ, काम में लाओ

धान की कटाई के बाद बची पराली को जलाना मिट्टी और हवा दोनों के लिए नुकसानदायक है।

क्या करें?

  • पराली को रोटावेटर से खेत में मिला दें यह हरी खाद की तरह काम करेगी।
  • इसे पशुओं के चारे, जैविक खाद या बायोफ्यूल बनाने में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • इससे मिट्टी की ताकत बनी रहती है और प्रदूषण नहीं फैलता।

मिट्टी की जांच जरूर कराएं

हर खेत की मिट्टी अलग होती है। बिना जांच के खाद डालना मतलब अंदाजे से इलाज करना।

कैसे करें?

  • खेत से मिट्टी का सैंपल लें और नजदीकी KVK या सॉयल टेस्टिंग लैब में जांच करवाएं।
  • रिपोर्ट के आधार पर ही खाद-उर्वरक डालें।
  • इससे फसल बेहतर होगी और खर्चा भी बचेगा।

गहरी जुताई और लेवलिंग जरूरी है

कटाई के बाद खेत को ऐसे ही मत छोड़िए।

क्यों करें?

  • गहरी जुताई से नमी बनी रहती है,
  • कीड़े-मकोड़े और जंगली घास खत्म होती है।
  • फिर खेत को समतल करें ताकि सिंचाई बराबर हो सके।

जैविक खाद से मिट्टी जिएगी, फसल हरेगी

रासायनिक खाद से उपज तो होती है, लेकिन मिट्टी थक जाती है।

क्या अपनाएं?

  • गोबर की खाद का इस्तेमाल करें
  • वर्मी कम्पोस्ट का इस्तेमाल करें
  • हरी खाद का इस्तेमाल करें

सिंचाई की तैयारी अभी से करें

रबी की फसलें पानी ज़्यादा मांगती हैं। अगर समय रहते तैयारी नहीं की, तो दिक्कत होगी।

क्या करें?

  • नहर, ट्यूबवेल, कुएं की मरम्मत करवा लें।
  • ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम लगवाएं पानी बचेगा, फसल भी खुश रहेगी।

बीज अच्छा तो फसल शानदार

बीज खराब निकला, तो सारी मेहनत बेकार जा सकती है।

क्या ध्यान रखें?

  • सरकारी या कृषि विश्वविद्यालय से प्रमाणित बीज ही खरीदें।
  • अपने क्षेत्र की मिट्टी और मौसम के अनुसार बीज की किस्म चुनें।
  • इससे फसल में रोग कम लगेंगे और उपज ज़्यादा होगी।

और ये भी पढ़े :- धान की फसल को बचाएं: गंधी बग और चूहों से निपटने के असरदार उपाय

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