Menu

Follow Us

उज्जैन में खेती की नई क्रांति! ‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ में इन 3 बड़ी योजनाओं पर रहेगा सरकार का जोर

Sonal Shah 12 hours ago 0 1

उज्जैन जिले के कृषि क्षेत्र के लिए साल 2026 बेहद खास होने वाला है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने किसानों की आय बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने के लिए ‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ के तहत एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इस विशेष वर्ष के दौरान उज्जैन में कृषि की सूरत बदलने के लिए तीन मुख्य स्तंभों—प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और सूक्ष्म सिंचाई—पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

जिला कृषि विकास योजना की अहम बैठक

हाल ही में उज्जैन के प्रशासनिक संकुल भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता जिला कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत जिला कृषि विकास योजना की समीक्षा करना और आने वाले समय के लिए ठोस रणनीति तैयार करना था। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि कृषि विकास की दिशा में यह योजना जिले के किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि वर्तमान समय में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और खेती की लागत कम करने के लिए ‘प्राकृतिक खेती’ की ओर मुड़ना अनिवार्य है। किसान कल्याण वर्ष 2026 के तहत उज्जैन में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य है कि किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से बचाकर, उन्हें पारंपरिक और सुरक्षित खेती के तरीकों से जोड़ा जाए। इससे न केवल उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि किसानों का स्वास्थ्य और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।

फसल विविधीकरण: जोखिम होगा कम

उज्जैन जिले के किसानों को अब परंपरागत फसलों के चक्र से बाहर निकलकर ‘फसल विविधीकरण’ (Crop Diversification) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। बैठक के दौरान चर्चा हुई कि एक ही तरह की फसल बार-बार उगाने से मिट्टी के पोषक तत्व कम हो जाते हैं और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से किसानों को नुकसान होता है। जिला कृषि विकास योजना के तहत किसानों को नई और लाभकारी फसलों की ओर प्रेरित किया जाएगा। इससे किसानों की आय के स्रोत बढ़ेंगे और किसी एक फसल के खराब होने पर उनके आर्थिक हितों की रक्षा हो सकेगी।

सूक्ष्म सिंचाई से होगा जल संरक्षण

खेती में पानी की बढ़ती किल्लत को देखते हुए ‘सूक्ष्म सिंचाई’ (Micro-irrigation) को जिला प्रशासन ने अपनी प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर रखा है। किसान कल्याण वर्ष 2026 के दौरान ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों के विस्तार पर काम किया जाएगा। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने निर्देश दिए कि सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के माध्यम से पानी की हर बूंद का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए। इससे कम पानी में अधिक रकबे की सिंचाई संभव होगी और फसलों की पैदावार में भी सुधार आएगा।

आने वाले समय की रणनीति

बैठक के समापन पर यह तय किया गया कि इन सभी योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर प्रभावी ढंग से किया जाएगा। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि साल 2026 तक उज्जैन के प्रत्येक पात्र किसान तक इन योजनाओं का लाभ पहुँचे। प्राकृतिक खेती, विविधीकरण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों के समन्वय से उज्जैन को कृषि के क्षेत्र में एक मॉडल जिला बनाने की तैयारी है।

Written By

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *