कर्नाटक में मछली की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोत्तरी: ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा भारी बोझ
कर्नाटक में समुद्री भोजन (सीफूड) के शौकीनों के लिए एक परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य के बाजारों में मछली की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, मछली की कीमतों में 190 फीसदी तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोत्तरी के कारण कुछ प्रमुख किस्मों की मछलियों के दाम अब 580 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जिससे आम ग्राहकों और रेस्टोरेंट संचालकों दोनों के लिए मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है।
कीमतों में उछाल का मुख्य कारण: मछली पकड़ने पर वार्षिक प्रतिबंध
कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में मछली की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे का सबसे बड़ा कारण समुद्री मछली पकड़ने पर लगा ‘वार्षिक प्रतिबंध’ है। नियम के अनुसार, समुद्र में मछली पकड़ने पर हर साल एक निश्चित अवधि के लिए रोक लगा दी जाती है। इस प्रतिबंध के लागू होने के कारण समुद्र से मछलियों का शिकार बंद हो गया है, जिसका सीधा असर बाजार में होने वाली सप्लाई पर पड़ा है। जब बाजार में मांग बनी रहती है और आपूर्ति अचानक कम हो जाती है, तो कीमतों में स्वाभाविक रूप से बढ़ोत्तरी होती है, जैसा कि इस समय कर्नाटक के बाजारों में देखा जा रहा है।
इन प्रमुख क्षेत्रों से आवक में हुई बड़ी गिरावट
कर्नाटक में मछली की आपूर्ति के लिए मुख्य रूप से तटीय शहर मंगलुरु (Mangaluru), उडुपी (Udupi) और कारवार (Karwar) जिम्मेदार माने जाते हैं। ये क्षेत्र राज्य की मछली मंडी की रीढ़ हैं। वार्षिक प्रतिबंध के कारण इन प्रमुख केंद्रों से होने वाली आवक (Supply) में भारी कमी आई है। मंगलुरु, उडुपी और कारवार जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों और मछली बाजारों में मछलियों की उपलब्धता घटने से स्थानीय मंडियों में दाम आसमान छू रहे हैं। आपूर्ति कम होने से न केवल ताजी मछली मिलना मुश्किल हो गया है, बल्कि जो स्टॉक उपलब्ध है, उसकी दरें सामान्य से कहीं अधिक हो गई हैं।
सार्डिन और मैकेरल जैसी मछलियां हुईं महंगी
बाजार में बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर उन मछलियों पर पड़ा है जिनकी मांग सबसे अधिक रहती है। रिपोर्ट के मुताबिक, सार्डिन (Sardine) और मैकेरल (Mackerel) जैसी लोकप्रिय मछलियों की कीमतों में तेज बढ़ोत्तरी हुई है। ये मछलियां आम तौर पर मध्यम वर्ग और समुद्री भोजन पसंद करने वाले लोगों की पहली पसंद होती हैं, लेकिन अब इनकी बढ़ी हुई लागत ने ग्राहकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 190 फीसदी तक की इस वृद्धि ने मछलियों की कीमतों को आम आदमी की पहुंच से दूर कर दिया है।
रेस्टोरेंट और ग्राहकों पर दोहरी मार
मछली की बढ़ती लागत का असर केवल घर के बजट तक ही सीमित नहीं है। समुद्री भोजन परोसने वाले रेस्टोरेंट भी इस मूल्य वृद्धि से सीधे प्रभावित हो रहे हैं। कच्चे माल की कीमत बढ़ने के कारण रेस्टोरेंट संचालकों के लिए पुरानी दरों पर भोजन उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो गया है। लागत में हुई इस बढ़ोत्तरी का भार अंततः ग्राहकों पर ही पड़ रहा है, क्योंकि रेस्टोरेंट में सीफूड डिशेस के दाम भी बढ़ गए हैं। बाजार में कम आपूर्ति और ऊंची कीमतों का यह दौर तब तक बने रहने की संभावना है जब तक कि मछली पकड़ने पर लगा वार्षिक प्रतिबंध समाप्त नहीं हो जाता और सप्लाई सामान्य नहीं हो जाती।
