प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार विवाद योजना के लाभ को लेकर नहीं, बल्कि इसमें शामिल होने और इससे बाहर निकलने की प्रक्रिया को लेकर खड़ा हुआ है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने फसल बीमा के नियमों में किए गए हालिया बदलावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं और सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
OTP की अनिवार्यता और चढूनी के आरोप
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने फसल बीमा योजना की प्रक्रिया में अब ‘OTP’ (वन-टाइम पासवर्ड) की अनिवार्यता को जोड़ दिया है। चढूनी का कहना है कि यह नया नियम उन किसानों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है जो इस योजना का हिस्सा नहीं बनना चाहते। उनके अनुसार, अब फसल बीमा से बाहर रहने (Opt-out) के लिए केवल लिखित आवेदन देना ही पर्याप्त नहीं रह गया है, बल्कि इसके लिए किसान के मोबाइल पर आने वाले OTP की भी मांग की जा रही है।
क्या स्वैच्छिक योजना को बनाया जा रहा है अनिवार्य?
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को सरकार ने स्वैच्छिक (Voluntary) घोषित किया हुआ है। इसका अर्थ है कि किसान अपनी इच्छा के अनुसार यह तय कर सकता है कि उसे अपनी फसल का बीमा करवाना है या नहीं। चढूनी का तर्क है कि यदि कोई योजना स्वैच्छिक है, तो उसमें शामिल न होने की प्रक्रिया अत्यंत सरल होनी चाहिए।
चढूनी ने सवाल उठाया है कि जो किसान पहले ही लिखित रूप में आवेदन दे चुके हैं कि उन्हें बीमा योजना में शामिल नहीं होना है, उनसे दोबारा OTP क्यों मांगा जा रहा है? उनका कहना है कि OTP की प्रक्रिया केवल उन किसानों के लिए होनी चाहिए जो योजना में शामिल होना चाहते हैं और अपना पंजीकरण करवाना चाहते हैं।
बीमा कंपनियों को फायदा पहुँचाने का अंदेशा
इस पूरे मामले में किसान नेता ने एक बड़ा अंदेशा जताया है। उनका आरोप है कि अधिकारियों द्वारा लागू की गई यह OTP की जटिल प्रक्रिया अंततः निजी बीमा कंपनियों को लाभ पहुँचाने का एक तरीका हो सकती है। उनका मानना है कि कई बार तकनीकी खामियों या किसानों द्वारा OTP न दे पाने की स्थिति में उन्हें जबरन योजना का हिस्सा बनाए रखा जा सकता है, जिससे उनके खातों से प्रीमियम की राशि कटती रहेगी और सीधा फायदा बीमा कंपनियों की जेब में जाएगा।
किसानों की मांग और सरकार की जिम्मेदारी
गुरनाम सिंह चढूनी ने सरकार से इस प्रक्रिया को तुरंत सुधारने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने लिखित में अपनी असहमति दे दी है, उन्हें बिना किसी अतिरिक्त डिजिटल बाधा (जैसे OTP) के योजना से बाहर रखा जाना चाहिए। किसानों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और तकनीकी जानकारी के अभाव के कारण OTP जैसी व्यवस्थाएं उनके लिए परेशानी का सबब बनती हैं।
अब देखना यह होगा कि किसान नेता द्वारा उठाए गए इन सवालों पर सरकार और संबंधित विभाग क्या स्पष्टीकरण देते हैं और क्या आने वाले समय में फसल बीमा की इस जटिल प्रक्रिया में कोई ढील दी जाती है या नहीं। फिलहाल, इस नए नियम ने किसानों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।
