मानसून की दस्तक के साथ ही जहां किसानों को अपनी फसलों के लिए राहत महसूस होती है, वहीं पशुपालकों के लिए यह समय चुनौतियों भरा भी हो सकता है। बारिश के मौसम में पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है, क्योंकि इस दौरान कई संक्रामक बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पशुपालकों को ‘गला घोंटू’ जैसी घातक बीमारी के प्रति आगाह किया गया है।
बारिश में बढ़ जाता है गला घोंटू का खतरा
बारिश के मौसम में वातावरण में नमी और तापमान में बदलाव के कारण पशुओं में ‘गला घोंटू’ बीमारी का जोखिम काफी बढ़ जाता है। यह बीमारी पशुओं के लिए अत्यंत कष्टदायक और जानलेवा साबित हो सकती है। अगर सही समय पर इस बीमारी की पहचान कर उचित कदम न उठाए जाएं, तो पशुपालक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जानकारों के अनुसार, मानसून के दौरान एक छोटी सी लापरवाही भी पशु की जान पर भारी पड़ सकती है।
बीमारी के मुख्य लक्षण: ऐसे करें पहचान
पशुपालकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि उनके पशु में गला घोंटू के लक्षण क्या हैं। इस बीमारी के शुरू होते ही पशु के व्यवहार और शारीरिक स्थिति में कई बदलाव दिखने लगते हैं। मुख्य संकेतों में शामिल हैं:
- गले में सूजन: इस बीमारी का सबसे प्रमुख लक्षण पशु के गले के नीचे और आसपास के हिस्से में सूजन आना है। यह सूजन दर्दनाक हो सकती है और पशु को काफी असहज करती है।
- तेज बुखार: संक्रमण की चपेट में आने के बाद पशु के शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है। तेज बुखार के कारण पशु सुस्त और कमजोर नजर आने लगता है।
- खाना-पीना छोड़ना: गले में सूजन और दर्द के कारण पशु चारा खाना और पानी पीना पूरी तरह से बंद कर सकता है। अगर पशु अचानक आहार लेना बंद कर दे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
- सांस लेने में तकलीफ: गला घोंटू बीमारी पशु के श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है। इस स्थिति में पशु को सांस लेने में काफी कठिनाई होती है और सांस लेते समय गले से ‘घर्र-घर्र’ की तेज आवाज सुनाई देती है।
सावधान! लापरवाही पड़ सकती है भारी
अक्सर देखा गया है कि लक्षणों को शुरुआती दौर में नजरअंदाज करने से बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। यदि किसी भी पशु में उपरोक्त लक्षणों में से कोई भी संकेत दिखाई दे, तो पशुपालक को तुरंत सक्रिय हो जाना चाहिए। इसमें देरी करने से संक्रमण अन्य स्वस्थ पशुओं में भी फैल सकता है और प्रभावित पशु की स्थिति बिगड़ सकती है।
बचाव और तत्काल उठाए जाने वाले कदम
जैसे ही पशु में गला घोंटू के लक्षण दिखाई दें, पशुपालकों को निम्नलिखित कदम प्राथमिकता के आधार पर उठाने चाहिए:
- पशु को अलग करें: सबसे पहले बीमार पशु को झुंड या अन्य स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग कर देना चाहिए। इससे संक्रमण के फैलने की संभावना को कम किया जा सकता है।
- पशु चिकित्सक से संपर्क: स्वयं उपचार करने के बजाय या देरी किए बिना तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञ द्वारा दी गई सलाह और उपचार ही पशु की जान बचा सकता है।
पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पशुओं के रहने के स्थान पर स्वच्छता का ध्यान रखें और बारिश के दौरान उनके खान-पान और व्यवहार पर पैनी नजर बनाए रखें। आपकी जागरूकता ही आपके पशुधन को सुरक्षित रख सकती है।
