Menu

Follow Us

MP में 15% कम बारिश, CM मोहन यादव की किसानों को बड़ी सलाह

Sonal Shah 5 hours ago 0 0

मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की चाल ने किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में मानसून के मौजूदा सीजन के दौरान वर्षा के आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदेश में अब तक हुई कुल बारिश औसत के मुकाबले काफी कम रही है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में खेती और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ सकता है।

मध्य प्रदेश में मानसून की वर्तमान स्थिति

भोपाल से प्राप्त ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 11 अगस्त 2026 तक मध्य प्रदेश में मानसून की बारिश का ग्राफ सामान्य से नीचे बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में औसत से लगभग 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। यह 15% की कमी कृषि प्रधान राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है। बारिश की यह कमी राज्य के विभिन्न हिस्सों में जल स्तर और सिंचाई के पारंपरिक साधनों को प्रभावित कर रही है, जिससे खरीफ की फसलों के साथ-साथ भविष्य की रबी फसलों के लिए भी चिंता पैदा हो गई है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की किसानों को अहम सलाह

राज्य में वर्षा की कमी को देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्थिति का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। उन्होंने प्रदेश के अन्नदाताओं से आग्रह किया है कि वे वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अपनी कृषि रणनीति में बदलाव लाएं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सुझाव दिया है कि जिन इलाकों में पानी की उपलब्धता कम है, वहां के किसानों को ऐसी फसलों का चयन करना चाहिए जिनमें कम सिंचाई की आवश्यकता होती है।

कम सिंचाई वाली फसलों पर जोर देने की जरूरत

मुख्यमंत्री की इस सलाह का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम पानी की स्थिति में भी किसानों की फसल सुरक्षित रहे और उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना न करना पड़े। जब मानसून की बारिश औसत से कम होती है, तो भूजल और जलाशयों का स्तर भी तेजी से नीचे गिरने लगता है। ऐसे में परंपरागत रूप से अधिक पानी की खपत वाली फसलें उगाना जोखिम भरा साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री ने इसी जोखिम को कम करने के लिए कम सिंचाई वाली फसलों (Low-Irrigation Crops) को अपनाने पर बल दिया है, जो कम वर्षा या सीमित पानी की उपलब्धता में भी बेहतर पैदावार देने में सक्षम होती हैं।

खेती के प्रबंधन में बदलाव का समय

11 अगस्त तक की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से संकेत दे रही है कि यदि बारिश की यह कमी बनी रहती है, तो प्रदेश में जल प्रबंधन और कृषि नियोजन को प्राथमिकता देनी होगी। मुख्यमंत्री द्वारा दी गई यह सलाह किसानों को समय रहते सतर्क करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे सिंचाई के लिए केवल वर्षा पर निर्भर न रहकर जल संचयन के महत्व को समझें और ऐसी किस्मों का चयन करें जो कम पानी में तैयार हो सकें। बारिश की 15 प्रतिशत की कमी कोई मामूली आंकड़ा नहीं है, और यही कारण है कि शासन स्तर से इस पर सक्रियता दिखाई जा रही है ताकि राज्य की कृषि व्यवस्था पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति कैसी रहती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल, मुख्यमंत्री के इस परामर्श को मानकर किसान अपनी खेती की योजना को नया रूप दे सकते हैं, जिससे प्रतिकूल मौसम में भी कृषि स्थिरता बनी रहे।

Written By

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *