बकानी रोग बासमती धान: बासमती धान की रोपाई को अब करीब दो महीने हो चुके हैं। यही वो समय होता है जब पौधे तेजी से बढ़ते हैं और तने मजबूत होते हैं। अगर इस दौर में पौधों को सही देखभाल मिले जैसे संतुलित मात्रा में खाद देना, समय पर पानी लगाना और खेत में खरपतवार पर कंट्रोल रखना तो फसल की पैदावार में काफी अच्छा इजाफा हो सकता है।
लेकिन इस बार मौसम किसानों की कड़ी परीक्षा ले रहा है। तापमान बार-बार बदल रहा है और नमी भी लगातार बनी हुई है। ऐसे में बकानी रोग बासमती धान में धीरे-धीरे में फैलने लगा है। ये रोग एक तरह की फफूंदी से होता है और अगर समय रहते ध्यान न दिया गया, तो फसल को 20 से 30 प्रतिशत तक का नुकसान पहुंचा सकता है।
क्या है बकानी रोग?
बकानी रोग एक फफूंदी से फैलने वाली बीमारी है जो धान की जड़ों और तनों पर हमला करती है। यह पौधों को अंदर से कमजोर बना देती है, जिससे उनकी वृद्धि रुक जाती है और बालियों का विकास अधूरा रह जाता है।
कैसे पहचानें बकानी रोग को?
- पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और किनारों से सूखने लगती हैं
- तना पतला और कमजोर नजर आता है, जैसे पौधा थक गया हो
- जड़ें सूखने लगती हैं और मिट्टी से पोषक तत्व नहीं खींच पातीं
- कई बार तनों की गांठों से नई जड़ें निकल आती हैं
- तनों पर सफेद या हल्की गुलाबी फफूंदी दिखने लगती है
कितना नुकसान कर सकता है ये रोग?
- पौधे की ग्रोथ रुक जाती है, यानी वो पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते।
- बालियां अधूरी रह जाती हैं या कमजोर बनती हैं।
- बालियां अधूरी रह जाती हैं या कमजोर बनती हैं।
- और सबसे बड़ा नुकसान पैदावार 20 से 30% तक घट सकती है।
फसल बचाने के लिए समय पर करें ये उपाय
- दवाई: Thiophanate‑methyl (थायोफिनेट मिथाइल) – 250 ग्राम
- पानी में घोलना: इसे 130–140 लीटर पानी में अच्छी तरह घोलें।
- छिड़काव का समय: सुबह या शाम में फसल पर समान रूप से छिड़काव करें।
रोकथाम के लिए अपनाएं ये सावधानियां
- रोपाई से ही नमी और जलनिकासी का ध्यान रखें
- खेत में पानी जमा न होने दें फफूंदी यहीं से शुरू होती है
- रोग-प्रतिरोधक किस्में चुनें
- हर 5-7 दिन में खेत की निगरानी करें
- फसल चक्र अपनाएं ताकि फफूंद लगातार खेत में न पनप सके
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