कम्पोस्ट खाद जैविक खेती: आज के समय में जैविक खेती और प्राकृतिक खादों की मांग लगातार बढ़ रही है। खेतों से लेकर किचन गार्डन तक, कम्पोस्ट खाद का इस्तेमाल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है और फलों-सब्ज़ियों में पोषण भी ज़्यादा होता है।
कम्पोस्ट खाद से खेती की उर्वरता बढ़ाएं और कम लागत में ज्यादा मुनाफा पाएं।
क्या है कम्पोस्ट खाद?
कम्पोस्ट खाद एक जैविक खाद है, जो पत्तियों, पराली, फलों-सब्जियों के छिलकों और रसोई के कचरे जैसे कार्बनिक अपशिष्टों के विघटन (डीकम्पोस्ट) से तैयार होती है। यह मिट्टी को पोषक तत्व प्रदान करती है और फसलों की उपज व गुणवत्ता दोनों को बेहतर बनाती है।
घर या खेत में कम्पोस्ट खाद कैसे बनाएं?
- सबसे पहले 3 मीटर लंबा, 2 मीटर चौड़ा और 1 मीटर गहरा गड्ढा खोदें।
- गड्ढे को थोड़ा सा गीला कर लें, ताकि नमी बनी रहे।
- अब इसमें एक परत सूखा और एक परत गीला कचरा डालें – जैसे पराली, पत्ते, सब्ज़ियों के छिलके, रसोई का कचरा आदि।
- हर परत पर थोड़ा पानी छिड़कें, ताकि सड़ने की प्रक्रिया ठीक से हो।
- जब गड्ढा भर जाए, तो ऊपर से करीब 15 सेमी मोटी मिट्टी की परत डालकर ढक दें।
- हर 15 दिन में कचरे को उलट-पलट करते रहें, जिससे सड़न बराबर हो।
- करीब 3 से 4 महीने में बढ़िया क्वालिटी की कम्पोस्ट खाद तैयार हो जाएगी।
कम्पोस्ट खाद के फायदे
- ज़्यादा निवेश की जरूरत नहीं घर की चीजों से भी शुरू कर सकते हैं।
- जैविक खाद से जमीन भी मजबूत होती है और उपज भी बेहतर होती है।
- गीले-सूखे कचरे का सही इस्तेमाल, प्रदूषण कम।
- गांव या आसपास के किसानों को खाद बेचकर अच्छी कमाई हो सकती है।
कम्पोस्ट खाद उत्पादन पर उपलब्ध सरकारी योजनाएं और सब्सिडी
अगर आप कम्पोस्ट यूनिट लगाना चाहते हैं, तो कृषि विभाग आपको सब्सिडी मिल सकती है। साथ ही, सरकारी अफसरों और एक्सपर्ट्स से तकनीकी मार्गदर्शन भी मिलता है। कई राज्यों में सरकार खुद कम्पोस्ट खाद की खरीद करती है, जिससे किसानों और उद्यमियों को बाजार की चिंता नहीं करनी पड़ती।
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