भारत सरकार के डिजिटल कृषि बाजार e-NAM (इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) पर 30 जून 2025 तक 1.79 करोड़ से अधिक किसान पंजीकृत हो चुके हैं। 2016 में शुरू हुई इस योजना का मकसद था कि किसानों को उनके फसल के लिए सही दाम मिले और उनका व्यापार ज्यादा पारदर्शी और आसान हो। अब किसान अपने उपज को सीधे डिजिटल मार्केट में बेच सकते हैं, जिससे उनके लिए फायदे के ज्यादा मौके बनते हैं।
e-NAM: किसानों का डिजिटल बाज़ार
ई-नाम एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है जो किसानों को उनकी उपज का सही और बेहतर दाम दिलाने में मदद करता है। इसका मकसद है कि किसानो को कीमतों का सही पता लग सके और किसानों को बिचौलियों के चक्कर में न पड़ना पड़े। ई-नाम कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मंडियों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है, जिससे किसान अपनी फसल आसानी से ऑनलाइन बेच सकते हैं और खरीददार भी सीधे जुड़ सकते हैं।
30 जून 2025 तक e-NAM की बड़ी उपलब्धियां
श्रेणी आंकड़ा
किसान किसान पंजीकृत 1,79,41,613
व्यापारी पंजीकृत 2,67,719
कमीशन एजेंट पंजीकृत 1,16,042
किसान उत्पादक संगठन (FPOs) 4,518
मंडियां जोड़ी गई हैं 1,522
कुल कृषि व्यापार मूल्य ₹4,39,941 करोड़
राज्यवार e-NAM पंजीकरण आंकड़े (30 जून 2025 तक)
- उत्तर प्रदेश – 33,05,157 किसान
- मध्य प्रदेश – 30,25,172 किसान
- हरियाणा – 27,27,249 किसान
- तेलंगाना – 18,23,959 किसान
- राजस्थान – 15,48,468 किसान
- आंध्र प्रदेश – 14,54,229 किसान
- महाराष्ट्र – 12,41,854 किसान
कृषि में डिजिटलीकरण: e-NAM की भूमिका
e-NAM आज भारत में कृषि के डिजिटलीकरण का एक मजबूत आधार बन चुका है। यह प्लेटफ़ॉर्म किसानों को देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद खरीदारों से सीधे जोड़ता है, जिससे उनकी उपज को बेचने का तरीका आसान और पारदर्शी बनता है। बिचौलियों की भूमिका कम होने से किसान को अपनी फसल का सही और पूरा दाम मिलने लगता है। साथ ही, उन्हें बार-बार मंडी के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ते है।
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