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जैविक तरीके से उगाई गई शकरकंद की फसल खेत में तैयार खड़ी है।

जैविक शकरकंद की खेती से किसानों को जबरदस्त मुनाफा – जानिए तरीका

Ashish Chouhan 7 months ago 0 11

जैविक शकरकंद की खेती: यह एक स्वाद में मीठी और सेहत के लिए फायदेमंद फसल है, जिसे भारत में लोग सालों से उगाते आ रहे हैं। अब जब लोग ऑर्गेनिक (जैविक) खाने को ज़्यादा पसंद करने लगे हैं, तो जैविक तरीक़े से शकरकंद उगाना किसानों के लिए एक अच्छा और मुनाफ़े वाला काम बनता जा रहा है।

इसकी बाज़ार में अच्छी मांग होती है, दाम भी अच्छे मिलते हैं और लोग उस पर ज़्यादा भरोसा करते हैं, क्योंकि उसमें रसायनों का इस्तेमाल नहीं होता।

जैविक शकरकंद की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी

  • इसे गर्म और आर्द्र जलवायु की जरूरत होती है।
  • भरपूर धूप वाली जगह होनी चाहिए।
  • बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें जल निकासी की व्यवस्था अच्छी हो।
  • जैविक खेती के लिए गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद आदि ज़रूरी हैं।

शकरकंद की उन्नत जैविक किस्में

  • पूसा रेड
  • पूसा सफेद
  • कोवई स्वरूप
  • सतारका

शकरकंद की खेती: आसान और असरदार तरीका

  1. खेत की तैयारी और खाद
  • खेत की गहरी जुताई करें और 10-15 दिन खुला छोड़ें कीट व फफूंद मर जाते हैं।
  • प्रति हेक्टेयर 15-20 टन गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालें।
  • नीम खली और जैविक फास्फोरस भी मिला सकते हैं।
  • जलभराव से बचने के लिए ऊँची क्यारियाँ बनाएं।
  1. बुवाई का तरीका
  • बेलों या कंदों से बुवाई करें, बीज से नहीं।
  • सही समय: फरवरी-मार्च या जून-जुलाई।
  • बेलें 20-25 सेमी के टुकड़ों में काटें और नर्सरी में लगाएं।
  1. सिंचाई प्रबंधन
  • पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करें।
  • फिर हर 7-10 दिन पर पानी दें।
  • कंद बनने के समय नमी बनाए रखें, पर जलभराव से बचें।
  1. जैविक खाद और कीट नियंत्रण
  • प्राकृतिक खाद: गोबर, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, नीम खली।
  • कीट/रोग से बचाव के लिए नीम तेल छिड़कें, ट्राइकोडर्मा डालें, छाछ का घोल छिड़कें। 

कटाई और भंडारण

  • 90-120 दिन में फसल तैयार हो जाती है।
  • कटाई से पहले हल्की सिंचाई करें ताकि मिट्टी नरम हो और कंद आसानी से निकाले जा सकें।
  • कंदों को छाया में सुखाएं, ताकि वे सड़ें नहीं और भंडारण योग्य बनें।
  • ठंडी, सूखी और हवादार जगह में 2-3 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

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