मिल्क रेवोल्यूशन-2: भारत आज भी दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है भारत हर साल लगभग 24 करोड़ टन दूध का उत्पादन करता है और इस तरह वह दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना हुआ है। हर रोज़ देशभर में करीब 65 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है, जो बहुत बड़ी मात्रा है।
भारत दूध उत्पादन में दुनिया में सबसे आगे है, लेकिन अब समय है कि हम गुणवत्ता, उत्पादकता और वैश्विक पहचान को भी बढ़ाएँ। इसलिए अब ‘मिल्क रेवोल्यूशन‑2’ ज़रूरी है यह केवल दूध उत्पादन की क्रांति नहीं, बल्कि दूध से समृद्धि तक पहुँचने की राह है।
डेयरी सेक्टर की प्रमुख समस्याएँ
- भारत में औसतन एक गाय सालाना 1.64 टन दूध देती है, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 11 टन है।
- भारत का वैश्विक डेयरी निर्यात केवल 0.3% है, जबकि अन्य देशों का निर्यात बहुत अधिक है।
- चारे की कीमतों में पिछले 30 वर्षों में 246% की वृद्धि हुई है, जबकि दूध की कीमतों में केवल 68% की वृद्धि हुई है।
- पारंपरिक तरीकों और कम आय के कारण युवा पीढ़ी खेती और पशुपालन से दूर हो रही है।
क्या बदलेगा मिल्क रेवोल्यूशन-2 से?
- प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ाएं- अच्छी नस्लें, सही पोषण और ध्यान से हर पशु से ज्यादा दूध मिलेगा।
- आधुनिक डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट बनाएं- दूध निकालना ही नहीं, सही तरीके से संभालना भी जरूरी है ताकि गुणवत्ता बनी रहे।
- देश और विदेश दोनों बाजारों पर ध्यान दें- दूध तो खूब बन रहा है, लेकिन उसे बेचने और एक्सपोर्ट करने पर भी जोर देना होगा।
- घी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दें- जैसे फ्रांस की चीज़ मशहूर है, वैसे ही भारत का घी भी दुनिया में जाना जा सकता है।
- कोऑपरेटिव मॉडल मजबूत करें- किसानों को सिर्फ पशु नहीं, बल्कि पूरी सहायता और सपोर्ट सिस्टम चाहिए।
- चारे की लागत कम करें- चारा सबसे बड़ा खर्चा है, इसे कम करना मुनाफे के लिए बहुत जरूरी है।
किसान की कमाई बढ़ाने के लिए कुछ आसान बातें हैं:
- सिर्फ 2-3 पशु पालने से काम नहीं चलेगा, ज्यादा पशु पालकर उत्पादन बढ़ाना होगा।
- साथ ही, छोटे-छोटे किसान मिलकर एक साथ काम करें, ताकि संगठन मजबूत हो और फायदे बढ़ें।
- दूध बेचते वक्त ध्यान रखें कि खर्च कम हो और दूध का सही दाम मिले, तभी असली कमाई होगी।
डेयरी प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग का बड़ा असर होता है।
- जैसे आइसक्रीम, दही, छाछ, पनीर जैसी चीजें सही पैकेजिंग से ही अच्छा बिकती हैं।
- अच्छी पैकेजिंग से ना सिर्फ उत्पाद की कीमत बढ़ती है, बल्कि उसका रखरखाव भी बेहतर होता है और ब्रांड की पहचान भी मजबूत होती है।
- आज के समय में पर्यावरण को ध्यान में रखकर ईको-फ्रेंडली पैकेजिंग अपनाना भी जरूरी हो गया है।
एक्सपोर्ट क्यों नहीं कर पा रहा भारत?
- गुणवत्ता और पैकेजिंग अच्छी नहीं होती, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान नहीं बन पाती।
- इंटरनेशनल सर्टिफिकेट लेने की प्रक्रिया जटिल है, जो एक्सपोर्टर्स के लिए मुश्किल पैदा करती है।
- सप्लाई चेन और कोल्ड स्टोरेज की कमी है, जिससे दूध और डेयरी उत्पाद सही हालत में पहुंच नहीं पाते।
- ज्यादातर दूध अनऑर्गनाइज़्ड मार्केट में जाता है, जिससे नियंत्रण और स्टैंडर्ड का अभाव रहता है।
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