Quinoa Farming: कम लागत में बंपर मुनाफा देने वाली ‘सुपरफूड’ फसल
आज के समय में जब लोग सेहत और पोषण को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं, तब “सुपरफूड” शब्द खूब सुना जा रहा है। इन्हीं सुपरफूड्स में से एक है क्विनोआ (Quinoa) एक ऐसी फसल जो प्रोटीन, फाइबर और अनेक पोषक तत्वों से भरपूर होती है। यह अनाज की तरह पकाई जाती है और अपने बेहतरीन पोषण मूल्य के कारण दुनियाभर में लोकप्रिय हो चुकी है। दक्षिण अमेरिका के एंडीज पर्वतों से निकली यह फसल अब भारत में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
Quinoa Farming क्यों कहलाता है ‘सुपरफूड’?
क्विनोआ को सुपरफूड कहा जाता है क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है और शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है। यह एक संपूर्ण प्रोटीन स्रोत है, यानी इसमें सभी जरूरी अमीनो एसिड पाए जाते हैं। शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का बेहतरीन विकल्प है। इसके अलावा, यह पूरी तरह ग्लूटेन-फ्री है, जो इसे एलर्जी या ग्लूटेन संवेदनशील लोगों के लिए सुरक्षित बनाता है। पोषण की दृष्टि से देखें तो क्विनोआ को सही मायनों में एक पावरहाउस फूड कहा जा सकता है।
Quinoa Farming: सूखा और पाला सहने वाली फसल
- क्विनोआ को बहुत कम पानी की जरूरत होती है।
- यह फसल कम देखभाल में भी अच्छी उपज देती है।
- सूखे मौसम में भी यह फसल टिक जाती है।
- हल्का पाला पड़ने पर भी इसे नुकसान नहीं होता।
- बदलते मौसम में भी यह आसानी से उगाई जा सकती है।
- किसान इसे “रिस्क-फ्री” यानी कम जोखिम वाली फसल मानते हैं।
क्विनोआ की प्रमुख किस्में
क्विनोआ मुख्य रूप से तीन रंगों में पाया जाता है – सफेद, लाल और काला।
- सफेद क्विनोआ- स्वाद में हल्का और पकने के बाद मुलायम बनता है।
- लाल क्विनोआ- रंग और कुरकुरापन बनाए रखता है, सलाद के लिए बेहतरीन।
- काला क्विनोआ- थोड़ा मीठा स्वाद देता है और पकने के बाद भी इसका रंग गहरा बना रहता है।
भारत में खास तौर पर दो उन्नत किस्में लोकप्रिय हैं –
- हिम शक्ति- उच्च उत्पादकता और पोषक तत्वों से भरपूर।
- टिटिकाका- जल्दी पकने वाली और अधिक उपज देने वाली किस्म, जिसके दाने छोटे लेकिन घने होते हैं।
रबी सीजन में क्विनोआ की खेती कैसे करें
- क्विनोआ की बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच करें।
- यह समय भारत के रबी सीजन के लिए सबसे उपयुक्त है।
- बीज अंकुरण के लिए: 18–24°C आदर्श।
- पौधे की वृद्धि के लिए: दिन में 35°C तक तापमान सहन कर सकता है।
- खेत को अच्छी तरह से तैयार करें (जुताई और समतलीकरण करें)।
- बीजों को 1.5 से 2 सेमी गहराई पर बोएं।
- रेतीली, दोमट या बंजर भूमि में भी क्विनोआ आसानी से उगाया जा सकता है।
पानी की जरूरत और फसल अवधि
- क्विनोआ को बहुत कम पानी की जरूरत होती है।
- कुछ हल्की सिंचाइयों से ही फसल अच्छी बढ़ती है।
- गोबर की खाद, यूरिया और DAP देने से पौधे मजबूत और स्वस्थ बनते हैं।
- फसल 120 से 140 दिनों में तैयार हो जाती है।
- जब पौधों की पत्तियां पीली पड़ जाएं और दाने सख्त होने लगें, तब कटाई करें।
- बीजों को धूप में अच्छी तरह सुखाएं।
क्विनोआ की खेती में खर्च कम और मुनाफा ज्यादा है।
एक एकड़ पर लगभग ₹4,000–₹5,000 का खर्च आता है, जबकि 4–5 क्विंटल तक पैदावार मिलती है। देश में इसकी कीमत करीब ₹20,000 प्रति क्विंटल है, और निर्यात करने पर ₹1 लाख तक मिल सकती है। यानी किसान एक एकड़ से ₹1–₹3 लाख तक कमा सकते हैं — कम लागत में ज़बरदस्त मुनाफा, यही बनाता है क्विनोआ को किसानों की ‘सुपरफूड फसल’।
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