कम लागत और आसान तकनीक से सिंघाड़ा की खेती बन रही है किसानों के लिए मुनाफे का जरिया।
किसान भाइयों, अगर आप अपने खेत या तालाब से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो सिंघाड़ा की खेती आपके लिए एक बढ़िया तरीका हो सकता है। इसे पानीफल या वॉटर चेस्टनट भी कहा जाता है। ये खासकर पानी वाली जगहों तालाब या नहर किनारे अच्छी तरह उगता है। सिंघाड़े के फल छोटे, काले-भूरे और थोड़े कांटेदार होते हैं, लेकिन इसका स्वाद में मिठास और कुरकुरापन होता है। और बाज़ार में इसकी माँग अच्छी रहती है, जिससे आपको अच्छी कीमत मिलती है।
सिंघाड़ा क्यों है खास?
- इसे उगाने के लिए महंगे मशीन या खेत जोतने की जरूरत नहीं होती।
- ये सिर्फ 4 से 6 महीने में फसल तैयार हो जाती है।
- इसमें विटामिन B, C और आयरन जैसे पोषक तत्व होते हैं। जो सेहत के लिए फायदेमंद होते है।
- ताज़ा सिंघाड़ा, सूखा सिंघाड़ा और सिंघाड़े का आटा तीनों की बाजार में अच्छी मांग और कीमत होती है।
खेती कैसे करें?
- सिंघाड़ा खेती के लिए 2-3 फीट गहरा पानी होना जरूरी है।
- अगर तालाब न हो तो खेत में मिट्टी की मेड़ बनाकर पानी भरें।
- पुराने सूखे सिंघाड़े को 24 घंटे पानी में भिगोकर 2-3 फीट दूरी पर बोएं।
- पानी की गहराई और साफ-सफाई बनाए रखें।
- हर दो महीने में गोबर की खाद डालें।
- तालाब के किनारे मछलियों से बचाव के लिए जाल लगाएं।
- पत्तियां पीली होने पर अक्टूबर-नवंबर में कटाई करें।
सिंघाड़ा की खेती कौन-कौन से राज्यों में होती है?
बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों में सिंघाड़ा की खेती होती है। इसे उगाने के लिए ज्यादा जमीन जोतने या महंगी मशीनों की जरूरत नहीं होती है। यह कम मेहनत और कम खर्च में आप इसकी फसल से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
सिंघाड़ा की खेती से कमाई ?
एक हेक्टेयर सिंघाड़ा के खेत से 20 से 30 क्विंटल तक फल मिल सकता है। ताज़ा सिंघाड़ा लगभग 50 से 80 रुपये प्रति किलो के बीच बिकता है। और इसके अलावा, सूखा फल या सिंघाड़े का आटा बेचकर मुनाफा और भी बढ़ाया जा सकता है। इस पूरी खेती पर करीब 10 से 15 हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन सही देखभाल से किसान लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं।
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