उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जैसे इलाकों में पहले किसान पारंपरिक मक्का बोते थे, लेकिन अब वे तेजी से स्वीट कॉर्न की खेती की तरफ बढ़ रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है यह फसल जल्दी तैयार हो जाती है, बाजार में इसकी अच्छी मांग है और कीमत भी सामान्य मक्के से 4-5 गुना ज्यादा मिलती है।
शहरों में स्वीट कॉर्न की डिमांड काफी बढ़ गई है। रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, ढाबों और सुपरमार्केट में इसका खूब इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में किसानों के लिए यह खेती आमदनी बढ़ाने का एक अच्छा मौका बन गई है। बहुत से किसान अब इसे एक फायदे का सौदा मान रहे हैं।
Sweet corn farming क्यों है किसानों के लिए फायदे का सौदा?
- सिर्फ 60 दिनों में फसल तैयार होती है
- सामान्य मक्के से 5 गुना ज्यादा दाम मिलता है
- ₹50-60 हजार की लागत में ₹3-5 लाख तक मुनाफा होता है
- सुपरमार्केट, रेस्टोरेंट और एक्सपोर्ट में इसकी खूब मांग है
- पॉलीहाउस/ग्रीनहाउस में इसे सालभर उगाया जा सकता है
Sweet corn farming के लिए खेत और मिट्टी की तैयारी
स्वीट कॉर्न को किसी भी सामान्य मिट्टी में उगाया जा सकता है, लेकिन अच्छी जल निकासी और 6-7 पीएच स्तर वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है।
तैयारी ऐसे करें:
- खेत को 2-3 बार अच्छी तरह जोतें
- प्रति हेक्टेयर 10-15 टन गोबर की खाद मिलाएं
- बुवाई के लिए फरवरी-मार्च या जुलाई-अगस्त सबसे अच्छा समय है
- प्रति हेक्टेयर 20-25 किलोग्राम बीज पर्याप्त
- लाइन से लाइन की दूरी: 60-75 सेमी
सिंचाई और देखरेख
- पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करें
- फिर हर 7-10 दिन में सिंचाई
- 20 दिन बाद पहली गुड़ाई करें खरपतवार नियंत्रण के लिए
- जैविक कीटनाशकों से कीट और रोगों का नियंत्रण करें
- कटाई तब करें जब दाने दूधिया अवस्था में हों – नरम और मीठे
स्वीट कॉर्न की खेती में ध्यान रखने वाली बातें
- कृषि विज्ञान केंद्र से प्रमाणित बीज लें
- ग्रीनहाउस, पॉलीहाउस या ड्रिप इरिगेशन पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाएं
- बाजार के ट्रेंड पर नजर रखें फसल तैयार होते ही बेचने की योजना बनाएं
- फसल को देर से न काटें, वरना मिठास और बाजार मूल्य कम हो सकता है
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