अगर आप कपास (बीटी कॉटन) की खेती करते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। इस साल एक बार फिर गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। यह कीट कपास की फलियों को अंदर से खा जाता है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। पहले से सतर्क रहना ही नुकसान से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।
क्या अब बीटी कॉटन की फसल सुरक्षित नहीं रही?
- यह कीट कपास के टिंडों के अंदर चला जाता है।
- बाहर से फसल ठीक दिखती है, लेकिन अंदर से पूरी खराब हो जाती है।
- इसलिए समय रहते पहचान और नियंत्रण जरूरी है।
गुलाबी सुंडी कपास को कैसे नुकसान पहुंचाती है?
गुलाबी सुंडी एक खतरनाक कीट है, जो कपास के गोलों के अंदर घुस जाती है। ये बाहर से दिखती नहीं, लेकिन अंदर से पूरा गोला खा जाती है। फसल ऊपर से ठीक लगती है, लेकिन जब खोलते हैं तो अंदर सब खराब निकलता है। इसलिए सतर्क रहना बहुत जरूरी है।
बीटी कॉटन की कीट-प्रतिरोधक ताकत क्यों कम हो रही है?
बीटी कॉटन की सबसे मशहूर तकनीक थी बॉलगार्ड-2 (BG-2)। इसे गुलाबी सुंडी से बचाने के लिए ही बनाया गया था। इसमें दो खास जीन डाले गए थे, ताकि फसल को कीटनाशक के बिना ही सुरक्षा मिल सके। लेकिन अब गुलाबी सुंडी ने खुद को बदल लिया है। अब उस पर ये तकनीक असर नहीं कर रही। पहले जहां दवा की जरूरत नहीं पड़ती थी, अब पछेती फसल में किसानों को बार-बार छिड़काव करना पड़ रहा है।
गुलाबी सुंडी का प्रकोप कैसे पहचानें?
- कपास बोने के 45 से 60 दिन बाद, हर एकड़ में 2 फेरोमोन ट्रैप लगाएं।
- अगर हर ट्रैप में रोज़ 5 से 8 पतंगे फंसें,
- या 100 फूलों में 10 फूल “गुलाब जैसे मुड़े” हुए दिखें,
- या हरे टिंडे (बॉल) को खोलने पर अंदर कीड़ा दिखे
- तो समझिए कि अब तुरंत एक्शन की जरूरत है।
गुलाबी सुंडी बीटी कॉटन से बचाने के उपाय
- नीम का तेल – 5 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर साफ मौसम में छिड़काव करें।
- यदि फसल पर प्रकोप 5-10% तक हो तो इन कीटनाशकों का उपयोग करें: ईमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG – 5 ग्राम/लीटर पानी, प्रोफेनोफॉस 50% EC – 5 मि.ली./लीटर पानी
- छिड़काव का समय सुबह या शाम को करें, जब तापमान कम हो और हवा न हो।
और ये भी पढ़े:- सोयाबीन की फसल पर मौसम की मार: किसान अब क्या करें?