ऑस्ट्रेलियाई मौसम विज्ञान एजेंसी की हालिया रिपोर्ट ने दुनिया भर के मौसम विज्ञानियों और कृषि विशेषज्ञों के बीच चिंता की लहर पैदा कर दी है। इस रिपोर्ट में दी गई चेतावनी के अनुसार, इस वर्ष जून के महीने से सक्रिय हुआ ‘अल नीनो’ (El Niño) लगातार अपनी शक्ति बढ़ा रहा है और आने वाले समय में यह और भी अधिक मजबूत हो सकता है। मौसम की यह घटना न केवल भारत के लिए, बल्कि दुनिया के कई अन्य हिस्सों के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रही है।
1950 के बाद की सबसे शक्तिशाली घटना होने की आशंका
ऑस्ट्रेलियाई एजेंसी के पूर्वानुमान के मुताबिक, वर्तमान में सक्रिय अल नीनो की यह स्थिति इतनी तीव्र हो सकती है कि यह पिछले 76 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ सकती है। बताया जा रहा है कि 1950 के बाद से अब तक जितनी भी अल नीनो की घटनाएं दर्ज की गई हैं, यह उनमें से सबसे शक्तिशाली और मजबूत घटनाओं की सूची में शामिल हो सकती है। 1950 का संदर्भ इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तब से मौसम के आंकड़ों का विश्लेषण काफी गहराई से किया जा रहा है, और यह स्थिति पिछले सात दशकों की सबसे गंभीर मौसमी घटनाओं में से एक मानी जा रही है।
भारत के मानसून और मौसम पर क्या होगा प्रभाव?
भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए अल नीनो की सक्रियता हमेशा से ही एक संवेदनशील विषय रही है, क्योंकि यहाँ की अधिकांश खेती मानसून की बारिश पर ही टिकी होती है। ऑस्ट्रेलियाई मौसम एजेंसी की इस चेतावनी का सीधा संकेत यह है कि भारत में आने वाले समय में मौसम के मिजाज में बड़े और अप्रत्याशित बदलाव देखे जा सकते हैं। आमतौर पर, अल नीनो का संबंध भारतीय उपमहाद्वीप में कमजोर मानसून और सामान्य से कम बारिश से जोड़ा जाता है। यदि यह घटना 1950 के बाद की सबसे मजबूत स्थिति में पहुंचती है, तो इसका सीधा असर मानसून की सक्रियता, बारिश की मात्रा और उसके भौगोलिक वितरण पर पड़ना लगभग तय है।
कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए बढ़ती चुनौतियां
खेती और किसानी के नजरिए से यह पूर्वानुमान अत्यंत महत्वपूर्ण है। जून से सक्रिय हुआ यह अल नीनो अब अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ रहा है, जिसका सीधा प्रभाव फसलों की पैदावार और भविष्य की कृषि योजनाओं पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, न केवल भारत, बल्कि दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी कृषि उत्पादन पर इसके प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। भारतीय किसानों के लिए यह खबर एक संकेत है कि वे आने वाले समय में मौसम की अनिश्चितता के लिए तैयार रहें। बारिश की संभावित कमी या मौसम में होने वाले असामान्य बदलाव फसलों की बुवाई और उनकी वृद्धि के चक्र को प्रभावित कर सकते हैं।
वैश्विक स्तर पर भी दिखेगा इस बड़े बदलाव का असर
ऑस्ट्रेलियाई मौसम एजेंसी ने यह स्पष्ट किया है कि यह केवल किसी एक विशेष क्षेत्र तक सीमित रहने वाली घटना नहीं है। यह एक व्यापक वैश्विक मौसमी घटना है जो पूरी दुनिया के वायुमंडल और समुद्री तापमान को प्रभावित करती है। चूंकि यह लगातार मजबूत हो रहा है, इसलिए आने वाले महीनों में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति या असामान्य तापमान वृद्धि देखी जा सकती है। भारत के संदर्भ में, इसके प्रभाव से कृषि चक्र में व्यवधान आने की संभावना है। यह पूर्वानुमान कृषि आधारित अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक चेतावनी की तरह है, ताकि वे समय रहते इस प्राकृतिक बदलाव के प्रति सचेत हो सकें।
कुल मिलाकर, 76 सालों का यह सबसे मजबूत संभावित अल नीनो आने वाले समय में मौसम और कृषि के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
