देशभर में खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की बुवाई का कार्य जोरों पर है। कृषि मंत्रालय और नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, देश के बड़े हिस्से में धान की फसल अपनी प्रारंभिक और विकासशील अवस्था में है। इस साल धान के रकबे में अच्छी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जो भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ सीजन में देश में धान की बुवाई अब तक 166 लाख हेक्टेयर से अधिक के विशाल क्षेत्र में की जा चुकी है।
धान के विशाल रकबे पर कीटों का साया
जैसे-जैसे धान की बुवाई का क्षेत्र बढ़ रहा है, वैसे-वैसे फसल की सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। 166 लाख हेक्टेयर के इस बड़े क्षेत्र में फसल को विभिन्न प्रकार के कीटों और बीमारियों से बचाना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस समय धान की खेती वाले क्षेत्रों में ‘ग्रीन लीफहॉपर’ (Green Leafhopper – GLH) के प्रकोप की संभावना देखी जा रही है। यह कीट धान की फसल को काफी नुकसान पहुँचाने के लिए जाना जाता है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है।
ग्रीन लीफहॉपर (GLH): क्या है किसानों की चिंता?
धान में ग्रीन लीफहॉपर का दिखना एक गंभीर संकेत है। यह छोटा हरा कीट न केवल पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर बनाता है, बल्कि यह कई प्रकार के वायरस रोगों को फैलाने का भी काम करता है। यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह फसल की वृद्धि को रोक सकता है और अंततः पैदावार में भारी गिरावट का कारण बन सकता है। 166 लाख हेक्टेयर में लगी फसल की सुरक्षा के लिए इस कीट की पहचान और सही समय पर प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
कब करें दवा का छिड़काव?
किसानों के मन में अक्सर यह सवाल होता है कि उन्हें दवा का छिड़काव कब शुरू करना चाहिए। कृषि विशेषज्ञों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, फसल की नियमित निगरानी करना ही बचाव का सबसे पहला कदम है। जैसे ही खेत में ग्रीन लीफहॉपर (GLH) की मौजूदगी के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, किसानों को सतर्क हो जाना चाहिए। दवा का छिड़काव तब सबसे प्रभावी होता है जब कीटों की संख्या एक निश्चित आर्थिक दहलीज स्तर (ETL) को पार करने लगे। असमय या बिना जरूरत के छिड़काव न केवल खर्च बढ़ाता है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचाता है। इसलिए, कीट की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद ही अनुशंसित कीटनाशकों का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
खरीफ सीजन में फसल प्रबंधन का महत्व
इस खरीफ सीजन में मानसून की स्थिति और 166 लाख हेक्टेयर का बुवाई क्षेत्र यह बताता है कि धान का उत्पादन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए कितना महत्वपूर्ण है। ऐसे में ग्रीन लीफहॉपर जैसे कीटों पर नियंत्रण पाने के लिए किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम होना होगा। सही समय पर कीटनाशकों का चुनाव और छिड़काव की सही विधि अपनाकर ही इस कीट के कहर से बचा जा सकता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करें और किसी भी प्रकार के कीट हमले की स्थिति में तुरंत उचित कदम उठाएं।
धान की इस विशाल खेती को कीटों से बचाकर ही बेहतर पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है। आने वाले दिनों में कीटों के प्रभाव और उनके प्रबंधन को लेकर किसानों को और अधिक जागरूक रहने की आवश्यकता होगी।
