हरियाणा के कृषि और राइस मिलिंग क्षेत्र में इस समय बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। राज्य के राइस मिल मालिकों के बीच खरीफ सीजन 2025-26 के कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की आपूर्ति को लेकर भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस भ्रम का मुख्य कारण सरकारी आदेशों में दिख रहा विरोधाभास है, जिसने न केवल मिलर्स बल्कि खरीद एजेंसियों की भी चिंता बढ़ा दी है।
सरकार ने बढ़ाई डेडलाइन, मिलर्स को मिली थी राहत
हरियाणा के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने मिल मालिकों को बड़ी राहत देते हुए कस्टम मिल्ड राइस (CMR) जमा करने की अंतिम समय सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया है। नए आदेशों के अनुसार, मिलर्स अब 30 सितंबर तक चावल की आपूर्ति कर सकते हैं। इस विस्तार का उद्देश्य मिल मालिकों को अपनी मिलिंग प्रक्रिया पूरी करने और चावल को सरकारी गोदामों तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त समय देना था।
आमतौर पर समय सीमा बढ़ने से मिल मालिकों को सुविधा होती है, क्योंकि इससे वे बिना किसी जुर्माने या दबाव के अपना काम सुचारू रूप से पूरा कर पाते हैं। लेकिन इस बार स्थिति सामान्य नहीं है।
FCI के फैसले ने बढ़ाई मुश्किलें: खरीद पर लगाई रोक
जहाँ एक ओर राज्य सरकार के विभाग ने समय सीमा को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया है, वहीं दूसरी ओर भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने एक अप्रत्याशित कदम उठाया है। FCI ने अगले आदेश तक CMR की खरीद को पूरी तरह से रोक दिया है। विभाग द्वारा समय सीमा बढ़ाने और FCI द्वारा खरीद रोकने के इन दो अलग-अलग फैसलों ने मिल मालिकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
FCI का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मिलर्स अपनी आपूर्ति पूरी करने की तैयारी में थे। खरीद रुकने से अब मिलों में तैयार चावल के भंडारण और उसकी समय पर डिलीवरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
राइस मिल मालिकों और खरीद एजेंसियों की बढ़ी चिंता
खरीफ सीजन 2025-26 के लिए CMR की आपूर्ति को लेकर बनी इस अनिश्चितता ने मिलर्स के माथे पर बल ला दिए हैं। मिल मालिकों का कहना है कि एक तरफ डेडलाइन बढ़ाई गई है ताकि काम पूरा हो सके, लेकिन जब FCI माल लेने को ही तैयार नहीं है, तो उस बढ़ी हुई डेडलाइन का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
इसके साथ ही, खरीद एजेंसियां भी इस स्थिति से परेशान हैं। एजेंसियों को चावल की सुचारू खरीद और भंडारण सुनिश्चित करना होता है, लेकिन FCI के रोक लगाने के आदेश के बाद पूरी प्रक्रिया बीच में ही अटक गई है। खरीद एजेंसियों को डर है कि यदि जल्द ही कोई स्पष्ट निर्देश नहीं आया, तो पूरे सीजन की कार्ययोजना प्रभावित हो सकती है।
भ्रम की स्थिति और आगे की राह
फिलहाल हरियाणा के राइस मिलर्स और संबंधित विभाग अगले आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। खरीफ सीजन के इस महत्वपूर्ण चरण में खरीद का रुकना पूरे कृषि व्यापार चक्र को प्रभावित कर सकता है। मिलर्स को उम्मीद है कि सरकार और FCI के बीच समन्वय बनेगा और खरीद की प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी, ताकि बढ़ी हुई डेडलाइन का लाभ मिल सके और किसान व मिल मालिक दोनों ही नुकसान से बच सकें।
