भारतीय कृषि परिदृश्य में मोटे अनाजों (Millets) का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। इसी कड़ी में रागी, जिसे ‘फिंगर मिलेट’ के नाम से भी जाना जाता है, एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पोषक अनाज के रूप में उभरकर सामने आया है। कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के अनुसार, रागी न केवल पोषण की दृष्टि से श्रेष्ठ है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।
रागी: पोषण का एक सशक्त विकल्प
रागी को इसके असाधारण पोषक गुणों के कारण एक महत्वपूर्ण अनाज माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक आहार में रागी को शामिल करना स्वास्थ्य के लिहाज से काफी लाभकारी हो सकता है। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने रागी के महत्व पर विशेष जोर दिया है। रागी में मौजूद प्राकृतिक गुण इसे अन्य अनाजों की तुलना में विशिष्ट बनाते हैं, विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए जहाँ पोषण की कमी एक बड़ी चुनौती है।
कृषि अनुसंधान और विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
रागी के महत्व को रेखांकित करने में कृषि अभियांत्रिकी और मृदा संरक्षण विशेषज्ञों की बड़ी भूमिका रही है। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के मृदा एवं जल संरक्षण अभियांत्रिकी विभाग और प्रसंस्करण एवं खाद्य अभियांत्रिकी विभाग के साथ-साथ भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के विशेषज्ञों द्वारा किए गए अध्ययन यह बताते हैं कि रागी एक ऐसी फसल है जो कम संसाधनों में भी बेहतर परिणाम देने की क्षमता रखती है।
प्रशांत शुक्ला (भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान) और हनुमान राम कड़वासरा (जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय) जैसे शोधकर्ताओं के अनुसार, रागी की खेती और इसके प्रसंस्करण (Processing) पर ध्यान देकर किसानों की आय और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य, दोनों में सुधार किया जा सकता है।
किसानों के लिए रागी की खेती के मायने
रागी एक ऐसी फसल है जो विविध जलवायु परिस्थितियों में खुद को ढालने की क्षमता रखती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, मोटे अनाजों की श्रेणी में आने के कारण रागी कम पानी और कम उपजाऊ भूमि में भी उगाई जा सकती है। यह विशेषता इसे उन किसानों के लिए एक आदर्श विकल्प बनाती है जो जलवायु परिवर्तन और जल संकट का सामना कर रहे हैं। रागी की फसल न केवल मिट्टी की सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है, बल्कि यह फसल चक्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भविष्य का ‘सुपरफूड’: मोटा अनाज
आज के समय में जब पूरी दुनिया ‘इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स’ के बाद मोटे अनाजों की ओर लौट रही है, रागी की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। यह अनाज ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पोषण का आधार बन सकता है। इसके प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के जरिए कई प्रकार के खाद्य उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जो बाजार में अच्छी मांग रखते हैं।
विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि रागी (Finger Millet) को बढ़ावा देना न केवल पोषण सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह कृषि के सतत विकास (Sustainable Development) की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। किसानों को रागी जैसी पोषक फसलों के प्रति जागरूक करना और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना आज के समय की मांग है।
