तमिलनाडु के डेयरी क्षेत्र में इन दिनों पशु चारे और मिनरल मिक्सचर (खनिज मिश्रण) की भारी किल्लत देखी जा रही है। राज्य की प्रमुख दुग्ध सहकारी संस्था के उत्पादन संयंत्रों में उत्पादन घटने से किसानों के सामने एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है। चारे की कमी और बढ़ती कीमतों ने न केवल पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि इससे दूध उत्पादन की लागत में भी भारी इजाफा हुआ है।
सहकारी संयंत्रों में उत्पादन की भारी कमी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य की दुग्ध सहकारी संस्था द्वारा संचालित पशु चारा और मिनरल मिक्सचर प्लांट वर्तमान में अपनी निर्धारित क्षमता से काफी कम स्तर पर काम कर रहे हैं। इन संयंत्रों में उत्पादन में आई इस गिरावट के कारण बाजार में आपूर्ति की कड़ी टूट गई है। जब सरकारी स्तर पर चारे और पोषक तत्वों की उपलब्धता कम होती है, तो इसका सीधा प्रभाव उन हजारों किसानों पर पड़ता है जो पूरी तरह से इन सहकारी समितियों पर निर्भर हैं।
निजी बाजार की बढ़ती कीमतें और किसानों की मजबूरी
सहकारी आपूर्ति में बाधा आने के कारण डेयरी किसानों को अब अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूरन निजी बाजार का रुख करना पड़ रहा है। निजी कंपनियां और व्यापारी इस स्थिति का लाभ उठाते हुए पशु आहार और चारे को काफी ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि निजी क्षेत्र से मिलने वाला चारा न केवल जेब पर भारी पड़ रहा है, बल्कि इससे उनके मासिक बजट पर भी बुरा असर पड़ा है।
पशुओं के लिए आवश्यक मिनरल मिक्सचर की कमी और उसके बढ़ते दाम किसानों के लिए दोहरी मार साबित हो रहे हैं। पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादकता के लिए यह मिश्रण अनिवार्य माना जाता है, लेकिन इसकी किल्लत ने पशुपालन को एक महंगा सौदा बना दिया है।
दूध उत्पादन की लागत में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
पशु आहार और मिनरल मिक्सचर की कीमतों में हुई इस अनियंत्रित बढ़ोतरी का सीधा असर दूध के उत्पादन खर्च पर पड़ा है। डेयरी व्यवसाय में चारे और दाने का हिस्सा सबसे बड़ा खर्च होता है। जब इन बुनियादी चीजों की दरें बढ़ती हैं, तो दूध उत्पादन की कुल लागत में भी वृद्धि हो जाती है। राज्य के कई हिस्सों में किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि उत्पादन लागत इसी तरह बढ़ती रही, तो उनके लिए डेयरी फार्मिंग को लाभकारी बनाए रखना असंभव हो जाएगा।
किसानों ने की सब्सिडी और नियमित आपूर्ति की मांग
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, तमिलनाडु के डेयरी किसान अब सरकार और संबंधित प्रशासन से तत्काल राहत की मांग कर रहे हैं। किसानों की प्रमुख मांग यह है कि उन्हें पशु चारे पर उचित सब्सिडी प्रदान की जाए ताकि वे बढ़ी हुई कीमतों के बोझ को सहन कर सकें। इसके साथ ही, किसानों ने सहकारी संयंत्रों में उत्पादन को फिर से पटरी पर लाने और चारे की नियमित सप्लाई सुनिश्चित करने की भी पुरजोर मांग की है।
किसानों का तर्क है कि यदि सरकार समय रहते हस्तक्षेप नहीं करती है, तो राज्य में डेयरी उद्योग को बड़ा नुकसान हो सकता है। फिलहाल, किसान इस उम्मीद में हैं कि प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान देगा और पशु आहार की किल्लत को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएगा।
