भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित नई कृषि तकनीकों ने किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खोल दिए हैं। हाल ही में अरुणाचल प्रदेश से एक ऐसी ही प्रेरक सफलता की कहानी सामने आई है, जहाँ एक किसान ने अपनी बेकार पड़ी परती जमीन का सही उपयोग करके कृषि क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है। ICAR की वैज्ञानिक पद्धति को अपनाकर इस किसान ने न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि अन्य ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।
परती जमीन पर ‘असम नींबू’ का सफल प्रयोग
यह सफलता की कहानी अरुणाचल प्रदेश के लेपराडा जिले की है। यहाँ के बासर सर्किल के अंतर्गत आने वाले गोरी-II गांव के निवासी एक 53 वर्षीय किसान ने अपनी बंजर और खाली पड़ी जमीन पर खेती करने का साहस जुटाया। अक्सर किसान ऐसी जमीन को खेती के अयोग्य मानकर छोड़ देते हैं, लेकिन वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से इस जमीन की तस्वीर बदली जा सकती है, इसे इस किसान ने साबित कर दिखाया है।
किसान ने अपनी 0.2 हेक्टेयर की छोटी सी परती जमीन पर ‘असम नींबू’ (Assam Lemon) की खेती शुरू की। इस पूरी परियोजना में उन्हें ICAR की उन्नत तकनीक का भरपूर सहयोग मिला, जिसकी मदद से उन्होंने कम मेहनत और सीमित संसाधनों में भी नींबू की बेहतरीन पैदावार प्राप्त की है।
मात्र 0.2 हेक्टेयर से ₹36,000 की शुद्ध कमाई
खेती के इस मॉडल की सबसे खास बात यह रही कि इसमें बहुत बड़े भू-भाग की आवश्यकता नहीं पड़ी। किसान ने केवल 0.2 हेक्टेयर क्षेत्र में ही असम नींबू के पौधे लगाए थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस छोटी सी जोत से किसान को ₹36,000 की अच्छी-खासी आमदनी हुई है। यह आय उन किसानों के लिए एक बड़ा सबक है जो सोचते हैं कि छोटी जमीन पर खेती करना फायदेमंद नहीं होता है।
असम नींबू अपनी विशिष्ट सुगंध और रस की प्रचुरता के लिए जाना जाता है, और बाजार में इसकी मांग भी अच्छी रहती है। वैज्ञानिक तरीके से की गई खेती के कारण फलों की गुणवत्ता बेहतर रही, जिससे किसान को स्थानीय स्तर पर अच्छा लाभ प्राप्त हुआ।
ICAR तकनीक का योगदान और किसानों का रुझान
इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की तकनीक ने मुख्य भूमिका निभाई। परती जमीन को खेती योग्य बनाने और पौधों की उचित देखभाल के लिए दी गई वैज्ञानिक सलाह का ही परिणाम है कि आज किसान इस स्तर पर लाभ कमाने में सक्षम हुए हैं। आधुनिक कृषि उपकरणों और जैविक खादों के संतुलित प्रयोग के साथ-साथ पौधों के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस सफलता से उत्साहित होकर, गोरी-II गांव के यह किसान अब अपनी खेती का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। उनकी सफलता को देखते हुए क्षेत्र के अन्य किसान भी अब अपनी खाली पड़ी जमीनों पर असम नींबू और अन्य नकदी फसलों की खेती करने के प्रति आकर्षित हो रहे हैं।
खेती के विस्तार की योजना
0.2 हेक्टेयर से मिली इस शुरुआती सफलता के बाद किसान का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे आने वाले समय में खेती के क्षेत्र को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि न केवल अपनी खाली पड़ी जमीन को पूरी तरह उपयोग में लाया जाए, बल्कि अधिक उन्नत तकनीकों का उपयोग करके उत्पादन को और अधिक बढ़ाया जा सके।
यह मामला स्पष्ट करता है कि यदि सही मार्गदर्शन और तकनीक उपलब्ध हो, तो सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में भी खेती को एक लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है। परती जमीन पर असम नींबू की यह खेती आने वाले समय में क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर सकती है।
