तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में गन्ने की खेती करने वाले किसान इन दिनों एक बड़े संकट के दौर से गुजर रहे हैं। क्षेत्र में कम बारिश और व्हाइट ग्रब (White Grub) कीट के भीषण प्रकोप ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि गन्ने की हरी-भरी रहने वाली फसल अब खेतों में ही सूखने लगी है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
व्हाइट ग्रब और सूखे की दोहरी मार
धर्मपुरी जिले के किसानों के लिए इस बार की खेती चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। एक तरफ जहां बारिश की कमी ने मिट्टी की नमी को खत्म कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ व्हाइट ग्रब कीट के हमले ने फसल की जड़ों को खोखला कर दिया है। यह कीट गन्ने की जड़ों को अपना निशाना बनाता है, जिससे पौधा मिट्टी से जरूरी पोषक तत्व और पानी नहीं ले पाता। इसके परिणामस्वरूप, गन्ने के पौधे पीले पड़ने लगते हैं और धीरे-धीरे पूरी तरह सूख जाते हैं।
मवेशियों का चारा बन रही है गन्ने की फसल
खेतों में खड़ी फसल की बर्बादी को देख किसान बेहद हताश हैं। जिन गन्ने की फसलों से चीनी मिलों तक पहुंचने और अच्छी कमाई की उम्मीद थी, उन्हें अब किसान मजबूरन काटकर अपने मवेशियों को खिला रहे हैं। सूखती फसल को बाजार में बेचना संभव नहीं रह गया है, जिसके कारण पशुओं के चारे के रूप में इसका इस्तेमाल करना ही किसानों के पास आखिरी विकल्प बचा है।
1,500 हेक्टेयर से अधिक का नुकसान
स्थानीय रिपोर्ट्स और प्राथमिक अनुमानों के अनुसार, धर्मपुरी जिले में अब तक 1,500 हेक्टेयर से अधिक गन्ने की फसल कीट और सूखे की चपेट में आकर प्रभावित हो चुकी है। प्रभावित क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते कीट नियंत्रण और जल प्रबंधन के उपाय नहीं किए गए, तो पूरे क्षेत्र की गन्ने की खेती ठप हो सकती है।
मुआवजे और नई किस्मों की मांग
अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्रभावित किसानों ने सरकार और संबंधित विभाग से मदद की अपील की है। किसानों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- 4,000 रुपये प्रति टन मुआवजा: फसल के भारी नुकसान की भरपाई के लिए किसानों ने सरकार से 4,000 रुपये प्रति टन की दर से मुआवजे की मांग की है।
- सूखा व कीटरोधी किस्में: किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों और प्रशासन से आग्रह किया है कि भविष्य में ऐसी गन्ने की किस्में (Varieties) उपलब्ध कराई जाएं जो कम पानी में भी जीवित रह सकें और जिन पर कीटों का प्रभाव कम हो।
धर्मपुरी के किसान अब प्रशासन की ओर देख रहे हैं कि कब उन्हें इस संकट से उबारने के लिए राहत पैकेज और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। फिलहाल, खेतों में सूखता गन्ना किसानों की व्यथा को बयां कर रहा है।
