पिहोवा में धान खरीद में फर्जीवाड़े का आरोप, किसानों की बढ़ी चिंता
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा में धान खरीद को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी फसल अभी खेतों में खड़ी है। इसके बावजूद, सरकारी रिकॉर्ड में धान की बिक्री दर्ज हो चुकी है। इस मामले ने सरकारी खरीद प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर गड़बड़ी का आरोप
किसानों के मुताबिक, ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर उनकी जमीन का गलत इस्तेमाल हुआ है। आरोप है कि उनके नाम पर करीब 87 क्विंटल धान की बिक्री दर्ज की गई है। हालांकि, किसानों का कहना है कि उनकी फसल अभी तक खेतों में खड़ी है। उसकी कटाई भी नहीं हुई है।
इस मामले में पोर्टल के रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति में अंतर नजर आ रहा है। इसलिए किसानों ने इस कथित गड़बड़ी की जांच की मांग की है।
MSP पर धान बेचने में आ रही परेशानी
इस कथित फर्जीवाड़े का असर किसानों की फसल बिक्री पर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि पोर्टल पर पहले से बिक्री दर्ज होने के कारण वे अपनी उपज नहीं बेच पा रहे हैं।
नतीजतन, उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान बेचने में परेशानी हो रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान का डर है। एक तरफ उनकी फसल का रिकॉर्ड गलत होने का आरोप है। दूसरी तरफ, वे अपनी मेहनत की उपज बेचने के लिए भी परेशान हैं।
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पोर्टल पर धान की बिक्री किसने दर्ज की।
इसके अलावा, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि किसानों की जमीन का विवरण कैसे इस्तेमाल हुआ। साथ ही, करीब 87 क्विंटल धान की बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।
फिलहाल, मामले में जांच जारी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कथित गड़बड़ी के पीछे कौन जिम्मेदार है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
पोर्टल की सुरक्षा को लेकर किसानों की चिंता
इस घटना के बाद दूसरे किसान भी अपने रिकॉर्ड को लेकर चिंतित हैं। उन्हें डर है कि कहीं उनकी फसल का विवरण भी गलत तरीके से इस्तेमाल न हो जाए।
इसलिए किसानों ने पोर्टल की सुरक्षा मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार को पंजीकरण प्रक्रिया की बेहतर निगरानी करनी चाहिए। साथ ही, किसानों के रिकॉर्ड में किसी भी बदलाव की जानकारी उन्हें मिलनी चाहिए।
फिलहाल, प्रभावित किसान अपनी फसल बेचने की समस्या के समाधान का इंतजार कर रहे हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर है।