राजस्थान में मानसून की बेरुखी: 16 साल का सबसे गहरा संकट
राजस्थान के कृषि क्षेत्र के लिए इस साल का मानसून सीजन चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। राज्य में मानसून की भारी कमी के कारण पिछले 16 वर्षों का सबसे बड़ा सूखा संकट खड़ा हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस साल मानसून के दौरान राजस्थान में सामान्य से 20 प्रतिशत से भी ज्यादा कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश का यह स्तर राज्य की कृषि व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है, जिससे खेती-किसानी पर आधारित लाखों परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
आंकड़ों में बारिश की भारी गिरावट
मौसम के बदलते मिजाज ने राजस्थान के बड़े हिस्से को सूखे की चपेट में ले लिया है। मानसून की इस बेरुखी का सबसे ज्यादा असर पश्चिमी और दक्षिणी राजस्थान के जिलों में देखा जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में 20 प्रतिशत से अधिक की यह कमी पिछले डेढ़ दशक में सबसे बड़ी गिरावट है। बारिश की इस अनुपलब्धता ने भूजल स्तर और सिंचाई के साधनों पर भी दबाव बढ़ा दिया है, जिससे आगामी फसलों के लिए भी स्थितियां कठिन होती नजर आ रही हैं।
पाली और जैसलमेर में हालात सबसे गंभीर
राज्य के कुछ जिलों में बारिश की कमी का स्तर इतना अधिक है कि वहां सामान्य जनजीवन और खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है। पाली जिले की बात करें तो वहां सामान्य से 58 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जो बेहद चिंताजनक है। इसी तरह, सीमावर्ती जिले जैसलमेर में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं, वहां बारिश में 54 प्रतिशत की भारी कमी पाई गई है। इन जिलों में औसत से आधी से भी कम बारिश होने के कारण खेती के लिए पानी की उपलब्धता न के बराबर रह गई है।
इन फसलों की पैदावार पर मंडराया संकट
राजस्थान की मुख्य खरीफ फसलों पर इस सूखे का सीधा असर पड़ता दिखाई दे रहा है। पानी की भारी किल्लत के चलते बाजरा, मूंग और ग्वार जैसी महत्वपूर्ण फसलों की पैदावार प्रभावित होने की प्रबल आशंका है। ये फसलें राजस्थान के किसानों की आय का मुख्य स्रोत हैं, लेकिन मानसून की कमी ने इनकी विकास प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, यदि बारिश की यही स्थिति बनी रही, तो इन फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिसका सीधा असर कृषि उपज मंडियों और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
80 तहसीलों और 14 जिलों में सूखे की आहट
सूखे का यह संकट केवल कुछ जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव काफी व्यापक है। राज्य के कुल 14 जिलों की लगभग 80 तहसीलें ऐसी हैं जहां मानसून की बारिश सामान्य से काफी कम हुई है। इन 80 तहसीलों में कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। बारिश की कमी के कारण बुवाई के लक्ष्यों को पूरा करना और खड़ी फसलों को बचाना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। राजस्थान के बड़े हिस्से में छाई इस सूखे की स्थिति ने कृषि क्षेत्र के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
