चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर से हटे किसान: 7 दिनों के बाद धरने का हुआ अंत
चंडीगढ़ और मोहाली की सीमाओं पर पिछले सात दिनों से अपनी मांगों को लेकर डटे किसानों का आंदोलन अब समाप्त हो गया है। सात दिनों तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद पंजाब सरकार और किसान संगठनों के बीच सहमति बन गई है। इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि सरकार ने किसानों को उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन दिया है, जिसके बाद किसानों ने बॉर्डर से हटने का फैसला किया।
सरकार का लिखित आश्वासन और किसानों की मांगें
किसान अपनी कई लंबित मांगों को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे थे। चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर चल रहा यह धरना पूरी तरह से खेती और किसानों के अधिकारों पर केंद्रित था। सरकार के साथ हुई चर्चा में कई अहम बिंदुओं पर लिखित तौर पर सहमति जताई गई है। इसमें मुख्य रूप से पानी की समस्या, किसानों पर बढ़ता कर्ज और बिजली आपूर्ति से जुड़े मुद्दे शामिल थे। किसानों का कहना था कि जब तक उन्हें ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे वहां से नहीं हटेंगे। सरकार के लिखित पत्र ने इस गतिरोध को तोड़ने का काम किया है।
इन प्रमुख मुद्दों पर बनी सरकार और किसानों के बीच सहमति
पंजाब सरकार और किसानों के बीच हुई इस वार्ता में आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। किसानों की जीत के रूप में देखे जा रहे इस समझौते में निम्नलिखित बिंदुओं को प्राथमिकता दी गई है:
- पानी की उपलब्धता: राज्य में कृषि कार्यों के लिए पानी के प्रबंधन और किसानों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने पर सहमति बनी है।
- कर्ज राहत: किसानों के ऊपर बढ़ते कर्ज के बोझ को देखते हुए, सरकार ने इस दिशा में उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
- बिजली कानून: बिजली से संबंधित किसानों की चिंताओं और मौजूदा कानूनों के प्रावधानों पर भी चर्चा की गई है।
- बीज कानून: खेती में बीजों की गुणवत्ता और उससे जुड़े कानूनों पर किसानों की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विचार करने का वादा किया है।
गन्ने के दाम और भुगतान पर बड़ा फैसला
इस आंदोलन में गन्ने की खेती करने वाले किसानों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण थी। गन्ने की फसल के दाम और उसके समय पर भुगतान को लेकर किसान काफी समय से संघर्ष कर रहे थे। समझौते के तहत, पंजाब सरकार ने गन्ने के दाम बढ़ाने और बकाया भुगतान की प्रक्रिया को सुचारू बनाने पर अपनी सहमति दे दी है। यह गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि भुगतान में देरी किसानों के लिए आर्थिक संकट का कारण बनती रही है।
सात दिनों के संघर्ष का समापन
पिछले एक हफ्ते से चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर किसानों के जमावड़े के कारण यातायात और सामान्य जनजीवन पर भी असर पड़ रहा था। किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए थे और कई दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी। हालांकि, सरकार के इस ताजा रुख और लिखित दस्तावेज ने आंदोलनकारियों को संतुष्ट किया है। किसानों ने अब अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है और बॉर्डर को खाली किया जा रहा है। सरकार के इस कदम से राज्य में कृषि क्षेत्र के इन विवादित मुद्दों के जल्द सुलझने की उम्मीद जगी है।
