भारतीय कृषि में गेहूँ एक प्रमुख फसल है, लेकिन इसकी खेती में मौसम का उतार-चढ़ाव हमेशा एक बड़ी चुनौती बना रहता है। विशेष रूप से जब फसल कटाई के करीब होती है, तब बेमौसम बारिश और तेज हवाएं किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर देती हैं। भोपाल से प्राप्त नवीनतम जानकारी के अनुसार, गेहूँ की खेती में ‘फसल गिरने’ (Lodging) की समस्या से निपटने के लिए मजबूत कल्लों वाली किस्मों पर जोर दिया जा रहा है।
फरवरी और मार्च के महीने में बढ़ता है फसल पर जोखिम
गेहूँ की खेती के चक्र में फरवरी और मार्च का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जानकारी के अनुसार, इसी समय गेहूँ की बालियों में दाना भरने की प्रक्रिया (Grain filling stage) चल रही होती है। जब बालियों में दाना भरता है, तो पौधे के ऊपरी हिस्से का वजन प्राकृतिक रूप से बढ़ जाता है। इसी संवेदनशील समय में जब अचानक तेज हवाएं चलती हैं या बेमौसम बारिश होती है, तो फसल के गिरने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
तेज हवा और बारिश का फसल पर प्रभाव
जब खेतों में नमी अधिक होती है और साथ में तेज हवाएं चलती हैं, तो गेहूँ का तना बालियों के बोझ को संभाल नहीं पाता। बेमौसम बारिश के कारण मिट्टी नरम हो जाती है, जिससे पौधों की जड़ों की पकड़ ढीली पड़ने लगती है। ऐसे में तेज हवाओं के झोंके पूरी की पूरी खड़ी फसल को जमीन पर बिछा देते हैं। फसल के इस तरह गिरने से न केवल उत्पादन में कमी आती है, बल्कि दानों की गुणवत्ता और चमक पर भी विपरीत असर पड़ता है।
मजबूत कल्ले: विपरीत मौसम में फसल का सुरक्षा कवच
इस समस्या के समाधान के रूप में ऐसी किस्मों की पहचान की गई है जिनके कल्ले (Tillers) काफी मजबूत होते हैं। मजबूत कल्लों वाली किस्मों की विशेषता यह है कि इनका तना नीचे से सुदृढ़ होता है, जो इसे तेज हवा के दबाव को झेलने की शक्ति प्रदान करता है। मजबूत संरचना वाली यह किस्म प्रतिकूल मौसम में भी खेत में सीधी खड़ी रहने का भरोसा देती है।
जब गेहूँ की फसल गिरती नहीं है, तो पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती रहती है, जिससे दानों का विकास सही तरीके से होता है। किसानों के लिए ऐसी किस्मों का चुनाव करना एक रणनीतिक फैसला साबित हो सकता है, जो उन्हें मौसम की अनिश्चितताओं से सुरक्षा प्रदान करे।
सही किस्म का चुनाव क्यों है आवश्यक?
अक्सर देखा गया है कि पारंपरिक या कमजोर तने वाली किस्में मौसम की हल्की मार भी नहीं झेल पातीं। दाना भरते समय फसल का गिरना सीधे तौर पर किसान की आय को प्रभावित करता है। भोपाल की इस रिपोर्ट के मुताबिक, गेहूँ की ऐसी किस्म जिसमें मजबूत कल्लों की विशेषता हो, वह फरवरी-मार्च के दौरान आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने में सक्षम है। यह तकनीकी सुधार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी फसल को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अतः, गेहूँ उत्पादक क्षेत्रों में मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए, किस्मों का चयन करते समय उनकी मजबूती और कल्लों की क्षमता को ध्यान में रखना भविष्य की खेती के लिए अनिवार्य होता जा रहा है।

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