किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने हाल ही में एक बड़ी घोषणा करते हुए कृषि क्षेत्र में एक नए आंदोलन की सुगबुगाहट तेज कर दी है। उन्होंने ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ का आह्वान किया है, जो 16 अगस्त से शुरू होने वाली है। यह यात्रा किसानों के मुद्दों को लेकर एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है, क्योंकि इसका गंतव्य दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर है।
16 अगस्त से शुरू होगी ‘किसान बचाओ पदयात्रा’
अभिमन्यु कोहाड़ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस यात्रा का आगाज़ 16 अगस्त को किया जाएगा। ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ के नाम से शुरू होने वाली इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य किसानों की स्थिति में सुधार लाना और उनकी आवाज़ को बुलंद करना है। पदयात्रा की तारीख की घोषणा के साथ ही किसान संगठनों और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
जंतर-मंतर तक कूच करने की तैयारी
इस पदयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका गंतव्य है। किसान नेता कोहाड़ ने स्पष्ट किया है कि यह यात्रा दिल्ली के जंतर-मंतर तक निकाली जाएगी। जंतर-मंतर ऐतिहासिक रूप से विभिन्न आंदोलनों और मांगों को रखने का एक प्रमुख केंद्र रहा है। किसानों का दिल्ली की ओर पैदल कूच करना इस बात का संकेत है कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक बड़ा कदम उठाने को तैयार हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर मांगों को उठाने का लक्ष्य
अभिमन्यु कोहाड़ ने इस पदयात्रा के उद्देश्य को साफ करते हुए बताया कि इसका लक्ष्य किसानों की मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। किसानों का मानना है कि जब तक उनकी समस्याओं को देश के बड़े मंचों पर मजबूती से पेश नहीं किया जाएगा, तब तक उनकी मांगों पर उचित ध्यान नहीं दिया जाएगा। इसी वजह से इस पदयात्रा की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई है कि यह न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे देश का ध्यान आकर्षित कर सके।
किसानों के हितों के लिए बड़ा कदम
खेती-किसानी के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों और किसानों के अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ को एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। 16 अगस्त से शुरू होने वाली यह यात्रा दिल्ली पहुँचने तक विभिन्न चरणों से गुजर सकती है। किसान नेता का यह ऐलान दर्शाता है कि आने वाले समय में कृषि से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय राजधानी में हलचल बढ़ने वाली है।
इस यात्रा के माध्यम से किसानों की किन-किन मांगों को प्रमुखता से रखा जाएगा, यह आने वाले समय में और स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ की घोषणा ने किसानों को एक नई उम्मीद दी है। पदयात्रा के दौरान किसानों का अनुशासन और उनकी एकता इस आंदोलन की सफलता की दिशा तय करेगी।
