हरियाणा के नूंह जिले से कृषि विभाग और किसानों के लिए एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। एग्रीस्टैक (AgriStack) योजना के तहत किसान पंजीकरण के मामले में नूंह जिला पूरे हरियाणा में सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, जिले में किसान आईडी (Kisan ID) बनाने की प्रक्रिया बेहद धीमी है, जिसके कारण बड़ी संख्या में किसान अभी भी इस डिजिटल डेटाबेस का हिस्सा नहीं बन पाए हैं।
नूंह में रजिस्ट्रेशन की स्थिति: आंकड़ों की जुबानी
24 अगस्त तक की रिपोर्ट के मुताबिक, नूंह जिले में किसान आईडी बनाने का काम बहुत पीछे चल रहा है। जिले में कुल पात्र किसानों में से केवल 37.73 फीसदी किसानों का ही अब तक पंजीकरण हो पाया है। यह आंकड़ा राज्य के अन्य जिलों की तुलना में काफी कम है, जो नूंह को एग्रीस्टैक योजना में हरियाणा का सबसे पिछड़ा जिला बनाता है।
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जिले के लगभग दो-तिहाई किसान अभी भी इस प्रणाली से नहीं जुड़े हैं। रजिस्ट्रेशन की यह धीमी रफ्तार प्रशासन और कृषि विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है, क्योंकि आने वाले समय में खेती से जुड़ी अधिकतर सुविधाओं को इसी डिजिटल आईडी से जोड़ने की तैयारी है।
68 हजार किसान अब भी रजिस्ट्रेशन से बाहर
रिपोर्ट के अनुसार, नूंह जिले में लगभग 68,000 किसान ऐसे हैं जिनका अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। इन किसानों की किसान आईडी नहीं बनने के कारण ये एग्रीस्टैक के दायरे से बाहर हैं। इतनी बड़ी संख्या में किसानों का पोर्टल पर न होना भविष्य में उनके लिए सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न कर सकता है। अधिकारियों द्वारा लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद, पंजीकरण की संख्या में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।
भविष्य में क्या होगा इसका असर?
एग्रीस्टैक योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों का एक एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है। अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में किसानों को मिलने वाली कई महत्वपूर्ण सुविधाएं सीधे इस किसान आईडी से जोड़ दी जाएंगी। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित लाभ शामिल हो सकते हैं:
- सरकारी सब्सिडी: कृषि यंत्रों या खादों पर मिलने वाली सब्सिडी के लिए किसान आईडी अनिवार्य हो सकती है।
- फसल मुआवजा: प्राकृतिक आपदा या फसल खराब होने की स्थिति में मिलने वाला मुआवजा भविष्य में इसी आईडी के जरिए सीधे खाते में भेजा जा सकता है।
- बीमा लाभ: फसल बीमा का क्लेम और प्रीमियम से जुड़ी प्रक्रियाएं भी एग्रीस्टैक से जुड़ने की संभावना है।
वर्तमान लाभों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
पंजीकरण की कमी को लेकर किसानों के बीच कुछ संशय भी हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल रजिस्ट्रेशन न कराने से मौजूदा सरकारी लाभों पर कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा। यानी जो किसान अभी तक अपनी आईडी नहीं बनवा पाए हैं, उन्हें मिल रही वर्तमान सरकारी सहायता या लाभ अभी प्रभावित नहीं होंगे। लेकिन, भविष्य की पारदर्शिता और सरकारी योजनाओं के सुचारू वितरण के लिए इस आईडी का होना अनिवार्य माना जा रहा है।
नूंह के किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे समय रहते अपना पंजीकरण पूरा कर लें ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता, मुआवजे या सब्सिडी प्राप्त करने में उन्हें तकनीकी दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
