खाद वितरण में अनियमितता पर सरकार का कड़ा रुख
बिहार के कृषि क्षेत्र में खाद की उपलब्धता और उसकी कीमतों को लेकर राज्य सरकार ने अब अपना रुख बेहद कड़ा कर लिया है। पिछले कुछ समय से किसानों द्वारा खाद की बिक्री में हो रही धांधली और मनमानी कीमतों की शिकायतें लगातार सरकार तक पहुँच रही थीं। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए कृषि विभाग और संबंधित मंत्रालय ने अब खाद विक्रेताओं और खाद निर्माता कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरकार की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
15 दिनों का अल्टीमेटम: सुधरने का आखिरी मौका
बिहार के कृषि मंत्री ने राज्य में खाद की बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए खाद कंपनियों और स्थानीय विक्रेताओं को 15 दिनों का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। इस निर्धारित अवधि के भीतर खाद वितरण से जुड़ी तमाम व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का यह कदम उन विक्रेताओं के लिए एक अंतिम चेतावनी है जो नियमों की अनदेखी कर खाद की बिक्री कर रहे हैं। इस 15 दिन की समय सीमा का उद्देश्य खाद वितरण प्रणाली में व्याप्त खामियों को दूर करना और किसानों को बिना किसी अतिरिक्त बोझ के खाद उपलब्ध कराना है।
ज्यादा कीमत और जबरन बिक्री (टैगिंग) पर लगेगी लगाम
किसानों की सबसे प्रमुख समस्या खाद के निर्धारित दामों से अधिक कीमत वसूला जाना है। कई स्थानों से ऐसी खबरें आई हैं कि विक्रेता खाद की किल्लत का फायदा उठाकर उसे ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। इसके अलावा, एक और बड़ी समस्या ‘टैगिंग’ की है। टैगिंग के तहत जब कोई किसान खाद खरीदने जाता है, तो उसे जबरन कुछ अन्य उत्पाद भी खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है जिनकी उसे आवश्यकता नहीं होती। सरकार ने इस ‘जबरन बिक्री’ की प्रथा को पूरी तरह से गलत ठहराया है और इसे तुरंत बंद करने का आदेश दिया है। अब खाद के साथ किसी अन्य उत्पाद को खरीदने का दबाव बनाना दंडात्मक अपराध की श्रेणी में माना जाएगा।
गड़बड़ी करने वाली कंपनियों को किया जाएगा ब्लैकलिस्ट
सरकार की यह कार्रवाई केवल छोटे दुकानदारों या स्थानीय विक्रेताओं तक ही सीमित नहीं रहेगी। कृषि मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि खाद वितरण और कीमतों में सुधार नहीं होता है, तो संबंधित खाद कंपनियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाली और व्यवस्था को बिगाड़ने वाली कंपनियों को ‘ब्लैकलिस्ट’ (काली सूची) में डालने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। ब्लैकलिस्ट होने का सीधा अर्थ यह होगा कि वे कंपनियां राज्य में अपने उत्पादों की आपूर्ति और व्यापार करने के अधिकार खो सकती हैं। यह कदम खाद आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है।
किसानों के हित में सरकार का संकल्प
सरकार की इस सख्त कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती के समय खाद की सही कीमत पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। अक्सर बुवाई के सीजन में खाद की मांग बढ़ जाती है, जिसका फायदा बिचौलिये और कुछ विक्रेता उठाते हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि फील्ड स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और यदि 15 दिनों के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं पाया गया, तो कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ लाइसेंस रद्द करने और प्राथमिकी दर्ज करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। इस फैसले से बिहार के लाखों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है जो खाद की कालाबाजारी और जबरन बिक्री से परेशान थे।
