भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत आने वाले भाकृअनुप-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान ने आगामी रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कृषि एडवाइजरी जारी की है। गेहूं की बुवाई का समय नजदीक आते ही संस्थान ने फसल सीजन 2026-27 के लिए अपनी नई गाइडलाइंस साझा की हैं, ताकि किसान समय रहते अपनी तैयारियों को पुख्ता कर सकें और बेहतर पैदावार सुनिश्चित कर सकें।
फसल सीजन 2026-27 के लिए विशेष तैयारी
भाकृअनुप-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान द्वारा जारी की गई यह सलाह विशेष रूप से गेहूं की अगेती बुवाई (Early Sowing) करने वाले किसानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि फसल चक्र को सही समय पर शुरू करने से न केवल पौधों को विकसित होने का पर्याप्त समय मिलता है, बल्कि यह बदलते मौसम के प्रतिकूल प्रभावों से भी फसल को बचाने में मदद करता है। संस्थान ने इस बात पर जोर दिया है कि आगामी सीजन में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए किसानों को उन्नत और अनुशंसित किस्मों का ही चयन करना चाहिए।
इन प्रमुख राज्यों के किसानों के लिए जारी हुए दिशा-निर्देश
इस नई एडवाइजरी में भारत के प्रमुख अनाज उत्पादक राज्यों को शामिल किया गया है। संस्थान ने विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश (यूपी), मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं। इन राज्यों की भौगोलिक स्थिति और जलवायु गेहूं एवं जौ की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है, इसलिए वैज्ञानिकों ने यहां के किसानों को अगेती बुवाई के दौरान विशेष सावधानी बरतने और उन्नत किस्मों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।
उन्नत किस्मों से मिलेगी बंपर पैदावार
संस्थान द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गेहूं और जौ की खेती में किस्मों का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फसल सीजन 2026-27 के लिए जिन उन्नत किस्मों की सिफारिश की गई है, वे उच्च उत्पादकता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। अगेती बुवाई के लिए इन किस्मों का उपयोग करने से फसल के खराब होने का जोखिम कम हो जाता है और पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है। संस्थान का उद्देश्य वैज्ञानिक पद्धति के माध्यम से किसानों की खेती को अधिक लाभदायक बनाना है।
बुवाई के समय ध्यान रखने योग्य बातें
भाकृअनुप-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान ने किसानों को सलाह दी है कि वे बुवाई से पूर्व मिट्टी की जांच और उचित बीज उपचार जैसी प्रक्रियाओं को भी महत्व दें। चूंकि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में रबी की फसल मुख्य आधार होती है, इसलिए वहां के किसानों के लिए यह एडवाइजरी एक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगी। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के किसानों को भी अपनी क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार संस्थान द्वारा सुझाई गई किस्मों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
आगामी फसल सीजन में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता से बचने के लिए किसान भाई संस्थान द्वारा जारी इन दिशा-निर्देशों का पालन कर सकते हैं। सही समय पर सही बीज का चुनाव ही खेती में सफलता की कुंजी है, और ICAR की यह नई सलाह इसी दिशा में एक सार्थक कदम है।
