मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में धान की खेती को लेकर एक उत्साहजनक परिणाम सामने आया है। कृषि विभाग की नई तकनीकों को अपनाने से किसानों को न केवल बेहतर फसल मिलने की उम्मीद है, बल्कि उत्पादन में भी बड़ी वृद्धि की संभावना दिख रही है। ताजा मामला जबलपुर जिले के विकासखंड पनागर के ग्राम कुशनेर का है, जहाँ धान की रोपाई की एक विशेष तकनीक ने पारंपरिक खेती के मुकाबले काफी बेहतर परिणाम दिए हैं।
एसआरआई पद्धति का सफल प्रदर्शन
जबलपुर के ग्राम कुशनेर में किसान कुलदीप द्वारा किए गए एक प्रदर्शन में यह पाया गया है कि एसआरआई (System of Rice Intensification) पद्धति से धान की रोपाई करने पर पौधों का विकास काफी बेहतर हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पारंपरिक पद्धति की तुलना में एसआरआई पद्धति से लगाई गई धान की फसल में कल्लों (Tillers) की संख्या दोगुनी पाई गई है। किसी भी धान की फसल में कल्लों की संख्या अधिक होना सीधे तौर पर बेहतर उपज का संकेत माना जाता है।
आत्मा परियोजना और कृषि विभाग की भूमिका
यह उपलब्धि मध्यप्रदेश किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की ‘आत्मा परियोजना’ (ATMA Project) के अंतर्गत हासिल की गई है। आत्मा परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की पद्धतियों से अवगत कराना और उन्हें तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है। इसी कड़ी में विकासखंड पनागर में इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया, ताकि अन्य किसान भी इससे प्रेरित होकर अपनी खेती में सुधार कर सकें।
पारंपरिक विधि बनाम एसआरआई पद्धति
आमतौर पर किसान धान की रोपाई पारंपरिक तरीके से करते आए हैं, जिसमें पानी और बीज की खपत अधिक होती है, लेकिन कल्लों का फटाव एक सीमित स्तर तक ही रहता है। इसके विपरीत, एसआरआई पद्धति में रोपाई के दौरान विशेष प्रबंधन किया जाता है। ग्राम कुशनेर के इस प्रयोग में स्पष्ट रूप से देखा गया कि जहाँ पारंपरिक विधि से कल्लों की संख्या सामान्य थी, वहीं एसआरआई पद्धति ने कल्लों की संख्या को दोगुना कर दिया। इस पद्धति के उपयोग से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उन्हें फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है, जिससे कल्लों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी होती है।
क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा
जबलपुर में हुए इस सफल प्रयोग के बाद अब आसपास के क्षेत्रों के किसानों में भी कृषि की इस उन्नत पद्धति को लेकर रुचि बढ़ने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों और विभाग का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाते हैं, तो कम लागत और सीमित संसाधनों में भी बेहतर पैदावार प्राप्त की जा सकती है। पनागर के इस सफल प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और सही मार्गदर्शन से खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है।
किसान कुलदीप के खेत में मिली यह सफलता न केवल उनके लिए गौरव की बात है, बल्कि जिले के अन्य धान उत्पादक किसानों के लिए भी एक मार्गदर्शिका का काम करेगी। कृषि विभाग आने वाले समय में ऐसी तकनीकों का विस्तार और अधिक क्षेत्रों में करने की योजना बना रहा है ताकि जिला स्तर पर धान के औसत उत्पादन को बढ़ाया जा सके।
