तेलंगाना के कृषि क्षेत्र के लिए वर्तमान समय अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। राज्य के एक बड़े हिस्से में फसलों पर सूखे का काला साया मंडरा रहा है, जिससे लाखों किसानों की मेहनत और लागत दांव पर लग गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य के कई जिलों में बारिश की कमी और सिंचाई के पर्याप्त साधनों के अभाव के कारण खेती की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है।
266 से अधिक मंडलों में सूखे की दस्तक
तेलंगाना के कृषि परिदृश्य से सामने आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य के 266 से भी अधिक मंडलों में इस समय भयंकर सूखे की स्थिति बनी हुई है। इन मंडलों में फसलें पानी की कमी के कारण मुरझाने लगी हैं। सूखे का यह प्रभाव केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने राज्य के एक बड़े भौगोलिक हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। सिंचाई के स्रोतों के सूखने और मानसून की बेरुखी ने स्थिति को और भी चिंताजनक बना दिया है।
4 लाख एकड़ में खड़ी फसलें खतरे में
इस प्राकृतिक संकट का सबसे बड़ा असर फसलों के रकबे पर पड़ा है। आधिकारिक आंकड़ों और स्थितियों के विश्लेषण से पता चला है कि लगभग 4 लाख एकड़ भूमि पर खड़ी फसलें इस समय पानी के लिए तरस रही हैं। यदि जल्द ही सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था नहीं की गई, तो इन फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। किसानों ने अपनी पूंजी और पसीना इन खेतों में लगाया है, लेकिन अब पानी की कमी उनके सपनों को सुखा रही है।
कृष्णा नदी के पानी पर टिकी किसानों की उम्मीदें
संकट की इस घड़ी में तेलंगाना के किसानों की निगाहें अब कृष्णा नदी पर टिकी हुई हैं। किसानों और स्थानीय निकायों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही है कि कृष्णा नदी से तत्काल पानी छोड़ा जाए ताकि सूखती हुई फसलों को जीवनदान मिल सके। किसानों का मानना है कि यदि समय रहते नदी का पानी सिंचाई नहरों तक पहुँच जाता है, तो 4 लाख एकड़ में लगी फसलों के एक बड़े हिस्से को बर्बादी से बचाया जा सकता है।
सरकारी स्तर पर हलचल: कर्नाटक सरकार से संपर्क
किसानों की गंभीर स्थिति और फसलों के नुकसान की आशंका को देखते हुए तेलंगाना सरकार सक्रिय हो गई है। हाल ही में तेलंगाना के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री से मुलाकात की और तेलंगाना के सूखे प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति से उन्हें अवगत कराया।
मुलाकात के दौरान, तेलंगाना के प्रतिनिधियों ने कर्नाटक सरकार से कृष्णा नदी से पानी रिलीज करने का औपचारिक आग्रह किया है। यह कदम अंतर-राज्यीय सहयोग के माध्यम से संकट को हल करने की एक महत्वपूर्ण कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। तेलंगाना सरकार का प्रयास है कि पड़ोसी राज्य के साथ समन्वय बैठाकर जल्द से जल्द पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके ताकि किसानों को राहत मिल सके।
आगे की राह और किसानों का इंतजार
वर्तमान में, तेलंगाना के लाखों किसान उम्मीद और डर के बीच जी रहे हैं। 266 मंडलों में फैली यह समस्या अब एक व्यापक कृषि संकट का रूप ले चुकी है। अब सबकी नजरें कर्नाटक सरकार के फैसले और कृष्णा नदी के जल स्तर पर हैं। यदि पानी रिलीज करने की प्रक्रिया में देरी होती है, तो इसका सीधा असर राज्य के कृषि उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ना तय है।
