हरियाणा के कृषि क्षेत्र में इन दिनों गन्ने की कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राज्य में चीनी की कीमतों में आई हालिया बढ़त के बाद, गन्ना किसानों ने अपनी फसल के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) में बड़ी बढ़ोतरी की मांग उठाई है। किसानों का मानना है कि जब बाजार में अंतिम उत्पाद यानी चीनी के दाम बढ़ रहे हैं, तो इसका सीधा लाभ उन उत्पादकों को भी मिलना चाहिए जो दिन-रात खेतों में पसीना बहाते हैं।
चीनी की कीमतों में उछाल और किसानों की बढ़ती मांग
हरियाणा में गन्ने की खेती करने वाले किसानों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि गन्ने का SAP बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। किसानों का तर्क है कि वर्तमान में चीनी के दाम जिस गति से बढ़ रहे हैं, उसके मुकाबले किसानों को मिलने वाला मूल्य काफी कम है। मांग का मुख्य आधार यह है कि चीनी मिलों को मिल रहे बेहतर मुनाफे का एक हिस्सा किसानों तक भी पहुँचना चाहिए ताकि वे अपनी आजीविका को सुदृढ़ कर सकें।
मौजूदा SAP और बढ़ती लागत का बढ़ता बोझ
वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो हरियाणा में गन्ने का मौजूदा SAP 415 रुपये प्रति क्विंटल है। किसानों के अनुसार, यह राशि अब खेती की बढ़ती लागत के सामने बौनी साबित हो रही है। डीजल, खाद, बीज और मजदूरी जैसे खेती के विभिन्न घटकों की कीमतें पिछले कुछ समय में काफी बढ़ गई हैं।
किसानों का कहना है कि 415 रुपये के भाव पर गन्ने की खेती करना अब घाटे का सौदा बनता जा रहा है। खेती की बढ़ती लागत और स्थिर मूल्य के बीच के इस बड़े अंतर ने किसानों को अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर चिंतित कर दिया है। इसी दबाव के चलते ₹600 प्रति क्विंटल की मांग अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेती दिख रही है।
वैकल्पिक फसलों का बढ़ता रुझान: क्या घटेगा गन्ने का उत्पादन?
गन्ने की खेती में बढ़ती लागत और कम मुनाफे का सीधा असर अब फसल चक्र पर पड़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कम रिटर्न मिलने की वजह से किसान अब पारंपरिक गन्ने की खेती से दूरी बना रहे हैं। इसके विकल्प के रूप में किसान अब मक्का और पॉपलर जैसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
पॉपलर और मक्का जैसी फसलों में किसानों को लागत के मुकाबले बेहतर मुनाफे की उम्मीद दिख रही है। विशेषज्ञों और किसान संगठनों का मानना है कि यदि सरकार ने समय रहते गन्ने के दामों में उचित वृद्धि नहीं की, तो गन्ने के रकबे (क्षेत्रफल) में भारी कमी आ सकती है। अगर रकबा घटता है, तो इसका सीधा असर गन्ने के कुल उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे आने वाले समय में चीनी मिलों के संचालन और चीनी की उपलब्धता पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
निष्कर्ष
हरियाणा के गन्ना किसान वर्तमान में एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। बढ़ती लागत और चीनी के बढ़ते दामों के बीच ₹600 प्रति क्विंटल की मांग न केवल किसानों की आर्थिक जरूरत है, बल्कि राज्य में गन्ने की खेती को बचाए रखने की एक कोशिश भी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग किसानों की इस बढ़ती मांग पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
