भारत में धान की खेती को लेकर एक चिंताजनक स्थिति सामने आ रही है। देश के कृषि क्षेत्र में धान एक प्रमुख फसल है, लेकिन हाल के आंकड़े बताते हैं कि इसकी उत्पादकता में वह गति नहीं देखी जा रही है जिसकी उम्मीद की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, धान की उत्पादकता वृद्धि की रफ्तार महज 0.5 फीसदी पर सिमट कर रह गई है। यह आंकड़ा कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है, क्योंकि बढ़ती आबादी और मांग के बीच पैदावार की यह धीमी गति भविष्य के लिए संकट खड़ा कर सकती है।
उत्पादकता में आई इस सुस्ती का कारण
भारत के कई हिस्सों में धान की पैदावार अब उस स्तर पर नहीं बढ़ पा रही है, जहां वह पहले हुआ करती थी। उत्पादकता में केवल 0.5 फीसदी की वृद्धि यह दर्शाती है कि पारंपरिक बीजों और पुरानी तकनीकों के साथ हम एक सीमा तक पहुंच चुके हैं। इस सुस्ती ने वैज्ञानिकों और सरकार को नई दिशा में सोचने पर मजबूर कर दिया है। खेती में आ रहे इस ठहराव को तोड़ने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेना अनिवार्य हो गया है, ताकि कम संसाधनों में अधिक पैदावार प्राप्त की जा सके।
जीनोम-एडिटेड धान: खेती में नई क्रांति की शुरुआत
धान की पैदावार पर लगे इस ब्रेक को हटाने के लिए सरकार अब एक बड़ी तैयारी कर रही है। कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाते हुए सरकार जल्द ही जीनोम-एडिटेड धान की एक नई किस्म, ‘पूसा राइस DST1’ (Pusa Rice DST1) को लॉन्च करने जा रही है। जीनोम-एडिटिंग तकनीक के माध्यम से तैयार की गई यह किस्म सामान्य किस्मों से काफी अलग और उन्नत मानी जा रही है। इसे कृषि क्षेत्र में एक ‘गेमचेंजर’ के रूप में देखा जा रहा है, जो उत्पादन के पुराने रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
सूखा और खारी मिट्टी में भी मिलेगी बेहतर उपज
खेती के सामने सबसे बड़ी समस्या मौसम की अनिश्चितता और मिट्टी की गिरती गुणवत्ता है। कई इलाकों में किसानों को सूखे का सामना करना पड़ता है, तो कहीं मिट्टी में खारापन बढ़ने से फसलें बर्बाद हो जाती हैं। ‘पूसा राइस DST1’ की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसे इन प्रतिकूल परिस्थितियों को झेलने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।
यह नई किस्म सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखती है। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों की मिट्टी खारी हो चुकी है, वहां भी यह किस्म दम नहीं तोड़ेगी और किसानों को एक स्थिर पैदावार देने में सक्षम होगी। यह तकनीक किसानों को उन चुनौतीपूर्ण वातावरणों में भी खेती करने का विकल्प देगी, जहां पहले फसल उगाना मुश्किल माना जाता था।
किसानों की आय बढ़ाने की जगी उम्मीद
धान की इस नई किस्म का सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ने की उम्मीद है। जब उत्पादकता में सुधार होगा और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी फसल सुरक्षित रहेगी, तो स्वाभाविक रूप से किसानों की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा। सरकार का लक्ष्य इस तकनीक के माध्यम से उन लाखों किसानों को लाभ पहुंचाना है जो हर साल मौसम की मार और खराब मिट्टी के कारण नुकसान झेलते हैं।
जीनोम-एडिटेड धान न केवल पैदावार बढ़ाएगा, बल्कि यह भारतीय कृषि को आधुनिकता की ओर भी ले जाएगा। ‘पूसा राइस DST1’ के सफल क्रियान्वयन से आने वाले समय में धान उत्पादन के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ने की संभावना है, जो देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती प्रदान करेगा।
