भारत को मिला पहला स्वदेशी कीटनाशक अणु, PI Industries ने किसानों के लिए लॉन्च किया Pioxazon®
भारत में कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। देश की प्रमुख एग्री-साइंस कंपनी PI Industries Ltd ने भारत में विकसित पहले स्वदेशी कीटनाशक अणु (Insecticide Active Ingredient) पर आधारित उत्पाद Pioxazon® (Pioxaniliprole 20% SC) लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार, इस कीटनाशक अणु को भारत में ही खोजा, विकसित और तैयार किया गया है। इसके विकास में एक दशक से अधिक समय का वैज्ञानिक शोध और अनुसंधान लगा है।
यह उपलब्धि भारतीय कृषि विज्ञान और फसल सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खास बात यह है कि इस नई तकनीक को भारतीय खेती की परिस्थितियों और किसानों की फसल संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
क्या है Pioxazon® और किन फसलों में होगा इस्तेमाल?
Pioxazon® एक कीटनाशक उत्पाद है, जिसका सक्रिय घटक (Active Ingredient) Pioxaniliprole है। इसे 20% SC फॉर्मूलेशन में बाजार में उतारा गया है। PI Industries के मुताबिक, इस उत्पाद को मुख्य रूप से धान, मक्का और चना की फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों के नियंत्रण के लिए विकसित किया गया है।
कंपनी के अनुसार, इसका इस्तेमाल निम्नलिखित कीटों के नियंत्रण के लिए पंजीकृत है:
- धान: तना छेदक (Yellow Stem Borer)
- मक्का: फॉल आर्मीवर्म (Fall Armyworm)
- चना: फली छेदक (Pod Borer)
इन कीटों के प्रकोप से फसलों को काफी नुकसान हो सकता है। ऐसे में प्रभावी फसल सुरक्षा किसानों के लिए महत्वपूर्ण है।
Pioxazon® की क्या हैं प्रमुख खूबियां?
PI Industries के अनुसार, Pioxazon® को कई विशेषताओं के साथ विकसित किया गया है। कंपनी द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इसके प्रमुख फायदे हैं:
1. तेजी से अवशोषण: कंपनी का दावा है कि छिड़काव के लगभग 30 मिनट के भीतर यह पौधों में अवशोषित हो जाता है। इससे बारिश और बदलते मौसम की परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलती है।
2. कीटों पर प्रभावी नियंत्रण: इसकी विशेष आणविक संरचना कीटों के लक्ष्य स्थल से जुड़ने में मदद करती है, जिससे प्रभावी कीट नियंत्रण का दावा किया गया है।
3. लंबे समय तक सुरक्षा: इसमें ट्रांसलैमिनर एक्शन की क्षमता बताई गई है, जिससे दवा पत्तियों के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचकर फसल को सुरक्षा प्रदान करने में मदद करती है।
4. लाभकारी कीटों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित: कंपनी के अनुसार, अनुशंसित मात्रा में उपयोग करने पर यह मकड़ियों, लेडीबर्ड बीटल और अन्य लाभकारी कीटों पर कम प्रतिकूल प्रभाव डालने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
10 साल से अधिक के शोध का परिणाम है यह तकनीक
PI Industries ने इस अणु को विकसित करने के लिए एक दशक से अधिक समय तक अनुसंधान किया है। कंपनी के मुताबिक, इसके विकास में मॉलिक्यूल डिस्कवरी, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, फॉर्मूलेशन साइंस, टॉक्सिकोलॉजी और एग्रोनॉमी जैसे क्षेत्रों में काम किया गया।
इस तकनीक का विभिन्न कृषि परिस्थितियों में मल्टी-लोकेशन फील्ड ट्रायल भी किया गया है। इसे केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) से पंजीकरण प्राप्त हुआ है।
PI Industries के वाइस चेयरपर्सन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर मयंक सिंघल के अनुसार, Pioxaniliprole भारत की अपनी वैज्ञानिक क्षमता और कृषि नवाचार का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसके माध्यम से कंपनी ने एक नए कीटनाशक अणु की खोज से लेकर उसके विकास और पंजीकरण तक की प्रक्रिया पूरी की है।
भारतीय कृषि के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?
अब तक भारत में कृषि रसायनों के क्षेत्र में कई तकनीकों के विकास और निर्माण में विदेशी अनुसंधान पर निर्भरता रही है। ऐसे में देश में ही नए कीटनाशक अणु की खोज, विकास और व्यावसायिक लॉन्च होना भारतीय कृषि अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
Pioxazon® के लॉन्च से यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय कंपनियां अब केवल कृषि उत्पादों के निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नई तकनीकों और सक्रिय घटकों के विकास में भी अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं।
हालांकि, किसानों को किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल करने से पहले फसल, कीट और अनुशंसित मात्रा की जानकारी उत्पाद के लेबल एवं लीफलेट से जरूर जांचनी चाहिए। छिड़काव के दौरान निर्धारित सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करना भी जरूरी है।
