खेती-किसानी के सीजन में खाद की मांग बढ़ते ही कई बार उर्वरक विक्रेताओं द्वारा किसानों का शोषण करने की खबरें सामने आती हैं। अक्सर देखा गया है कि यूरिया और डीएपी जैसे महत्वपूर्ण खाद को खरीदते समय दुकानदार किसानों पर अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव बनाते हैं। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए अब सरकार और कृषि विभाग पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहा है। प्रदेश में खाद की कालाबाजारी और जबरन अन्य उत्पाद बेचने (टैगिंग) की शिकायतों पर नकेल कसने के लिए विभाग ने एक बड़ा अभियान चलाया है।
9 हजार से ज्यादा जगहों पर हुई छापेमारी
कृषि विभाग की टीम ने प्रदेश भर में उर्वरक विक्रेताओं के ठिकानों पर सघन जांच अभियान चलाया है। विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक राज्य में 9 हजार से भी अधिक उर्वरक केंद्रों और डीलरशिप पर औचक निरीक्षण किया जा चुका है। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसानों को खाद निर्धारित दरों पर मिले और उन्हें किसी भी तरह का अनावश्यक सामान खरीदने के लिए मजबूर न किया जाए। इतनी बड़ी संख्या में हुई इस जांच ने अनियमितता बरतने वाले डीलरों के बीच हड़कंप मचा दिया है।
250 से अधिक डीलरों पर गिरी गाज
9000 से अधिक औचक निरीक्षणों के दौरान कई जगहों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया। विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए गड़बड़ी करने वाले 250 से ज्यादा खाद डीलरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इन डीलरों पर आरोप है कि वे खाद के मुख्य कट्टों के साथ किसानों को अन्य उत्पाद लेने के लिए बाध्य कर रहे थे या वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरत रहे थे। सरकार की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी विक्रेता को बख्शा नहीं जाएगा।
अब नहीं थोपे जाएंगे जिंक, सल्फर और कीटनाशक
आमतौर पर देखा जाता है कि जब किसान यूरिया या डीएपी लेने सहकारी समितियों या निजी डीलरों के पास जाते हैं, तो उन्हें खाद के साथ जबरन जिंक, सल्फर या विभिन्न प्रकार के कीटनाशक (Pesticides) थमा दिए जाते हैं। किसानों को कहा जाता है कि यदि वे ये अतिरिक्त उत्पाद नहीं लेंगे, तो उन्हें मुख्य खाद नहीं दी जाएगी। सरकार ने अब इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। कृषि विभाग के स्पष्ट आदेश हैं कि अब यूरिया और डीएपी के साथ किसी भी अन्य सामग्री को खरीदने के लिए किसानों को मजबूर नहीं किया जा सकेगा। यदि कोई डीलर ऐसा करता पाया जाता है, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
किसानों को मिलेगी बड़ी राहत
सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जो आर्थिक तंगी के बावजूद महंगे कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्व खरीदने को मजबूर थे। अब किसान अपनी जरूरत और स्वेच्छा के अनुसार ही खाद के साथ अन्य सामान खरीद सकेंगे। विभाग ने किसानों से भी अपील की है कि यदि कोई दुकानदार उन पर खाद के साथ जबरन दूसरा सामान लेने का दबाव बनाता है, तो उसकी शिकायत तुरंत संबंधित अधिकारियों से करें। सरकार का लक्ष्य है कि खाद वितरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और प्रदेश के हर किसान तक खाद की उपलब्धता बिना किसी बाधा के सुनिश्चित हो सके।
उर्वरक वितरण में सुधार और डीलरों पर की गई इस कार्रवाई से आगामी रबी और खरीफ सीजन के दौरान खाद की किल्लत और कालाबाजारी पर लगाम लगने की उम्मीद है। कृषि विभाग अपनी निगरानी को और भी कड़ा करने की योजना बना रहा है ताकि भविष्य में किसानों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
