Menu

Follow Us

जम्मू-कश्मीर में ETT तकनीक से भेड़ों की नस्ल सुधार, 5 गुना तेजी

Sonal Shah 15 hours ago 0 0

जम्मू-कश्मीर के पशुपालन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हुई है, जो राज्य के हजारों भेड़ पालकों की आय और जीवन स्तर को बदलने की क्षमता रखता है। सरकार ने राज्य में भेड़ों की नस्ल सुधारने के लिए आधुनिक ‘भ्रूण स्थानांतरण तकनीक’ (Embryo Transfer Technology – ETT) का सफलतापूर्वक इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस तकनीक के आने से भेड़ों की जेनेटिक गुणवत्ता में सुधार की प्रक्रिया पहले के मुकाबले 5 से 6 गुना ज्यादा तेज होने की उम्मीद है।

क्या है भ्रूण स्थानांतरण तकनीक (ETT)?

भ्रूण स्थानांतरण तकनीक एक उन्नत प्रजनन तकनीक है, जिसका उपयोग पशुओं की नस्ल को कम समय में बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। जम्मू-कश्मीर में इस तकनीक के इस्तेमाल का मुख्य उद्देश्य भेड़ों की स्थानीय नस्लों को उच्च उत्पादकता वाली विदेशी नस्लों के साथ उन्नत करना है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह जेनेटिक सुधार की गति को पारंपरिक प्रजनन विधियों की तुलना में 5 से 6 गुना बढ़ा देती है। इसका मतलब है कि जो सुधार पहले कई दशकों में होता था, उसे अब बहुत ही कम समय में हासिल किया जा सकेगा।

जकूरा लैब में पशुपालकों को मिलेगी मुफ्त सुविधा

भेड़ पालकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए जम्मू-कश्मीर के जकूरा स्थित प्रयोगशाला (Zakoora Lab) को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया गया है। यहाँ भेड़ पालकों और किसानों के लिए भ्रूण स्थानांतरण की सुविधा पूरी तरह से मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है। इस कदम का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को बिना किसी आर्थिक बोझ के उन्नत तकनीक का लाभ पहुंचाना है, ताकि वे अपने पशुधन की गुणवत्ता में सुधार कर सकें और अधिक मुनाफा कमा सकें।

मटन और ऊन उत्पादन में भारी बढ़ोतरी की तैयारी

जम्मू-कश्मीर में ऊन और मांस (मटन) की भारी मांग रहती है। स्थानीय उत्पादन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इस तकनीक के तहत विशेष नस्लों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इनमें ‘टेक्सेल’ (Texel) और ‘ऑस्ट्रेलियन मेरिनो’ (Australian Merino) जैसी विश्व प्रसिद्ध नस्लें शामिल हैं।

  • टेक्सेल नस्ल: यह नस्ल मुख्य रूप से मांस उत्पादन के लिए जानी जाती है। इसके इस्तेमाल से राज्य में मटन के उत्पादन में महत्वपूर्ण वृद्धि की उम्मीद है।
  • ऑस्ट्रेलियन मेरिनो: यह नस्ल अपनी बेहतरीन गुणवत्ता वाले ऊन के लिए दुनिया भर में मशहूर है। मेरिनो नस्ल के माध्यम से ऊन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार किया जाएगा।

पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा सकारात्मक असर

नस्ल सुधार की इस तेज प्रक्रिया से न केवल पशुओं की शारीरिक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी सुधार होगा। जब पशुपालकों के पास उच्च गुणवत्ता वाली भेड़ें होंगी, तो उनसे प्राप्त होने वाले ऊन और मांस का बाजार मूल्य भी अधिक मिलेगा। जकूरा लैब में शुरू हुई इस पहल से आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर भेड़ पालन के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बनकर उभर सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

इस नई तकनीक के साथ, राज्य सरकार का लक्ष्य पशुपालन को एक अधिक लाभदायक व्यवसाय बनाना है। किसानों को मुफ्त में दी जा रही यह सुविधा उनके लिए आधुनिक पशुपालन के द्वार खोल रही है, जिससे भविष्य में भेड़ पालन क्षेत्र की पूरी तस्वीर बदल सकती है।

Written By

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *